जयपुर , सितम्बर 10 -- राजस्थान में लम्पी रोग से 10 हजार से अधिक संक्रमित पशु पाये गये है और अब तक 16 पशुओं की मौत हुई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर लम्पी स्किन रोग की स्थिति एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए किये जा रहे उपायों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में लम्पी रोग से 10 हजार 403 संक्रमित पशु पाये गये है। इनमें से 6 हजार 905 पशुओं की रिकवरी हो चुकी है तथा रिकवरी में वृद्धि हो रही है। साथ ही प्रदेशभर में 87 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण किया जा चुका है।
पशुपालन विभाग द्वारा रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान, राज्य एवं जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पांस टीम का गठन, पशुपालकों को साइपरमेथ्रिन एवं सोडियम हाईपोक्लोराईट के वितरण सहित कई प्रयास किये है।
पशुपालन, गोपालन और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि इस वर्ष पूर्वी राजस्थान में लंपी के केस ज्यादा हैं लेकिन वहां भी स्थिति नियंत्रण में है। अब तक भरतपुर और डीग जिले में कुल 16 गौवंशों की मृत्यु लंपी के कारण हुई है। अधिकतर गौवंश रोग से मुक्त कर लिए गए हैं और शेष रह गए लगभग 4500 गौवंशों का उपचार जारी है। जल्द ही उन्हें भी रोगमुक्त कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि रोग को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें से टीकाकरण और जागरूकता अभियान मुख्य हैं। टीकाकरण इस रोग से बचाव का एक प्रमुख हथियार है इसलिए राज्य सरकार ने पशुओं के टीकाकरण पर जोर दिया जिससे रोग के प्रसार को समय रहते रोका जा सके। वर्ष 2026-27 में लगभग 90 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया जा चुका है।
इसके अलावा सरकार ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों को लंपी रोग के बारे में जानकारी भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि लंपी रोग पशुओं का एक संक्रामक रोग है। इससे मुख्य रूप से गौवंश प्रभावित होते हैं और पशुपालकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। प्रदेश पूर्व में इस रोग का दंश झेल चुका है। इसलिए सरकार अब इस रोग से बचाव के लिए सक्रिय होकर कार्य कर रही है।
उन्होंनेे कहा कि पिछले वर्ष भी दो महीने के टीकाकरण अभियान के तहत राज्य की लगभग 95 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया गया था जिससे रोग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया था और गौवंश की हानि लगभग नहीं के बराबर हुई थी। श्री कुमावत नेे विभाग की सराहना करते हुए कहा कि इस रोग के सर्वेक्षण, निदान और नियंत्रण के लिए समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
श्री कुमावत ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने गौवंश की विशेष निगरानी रखें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत पशु चिकित्सा संस्थानों और पशु चिकित्सकों से संपर्क करें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित