जयपुर , जनवरी 24 -- राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए करीब ढाई लाख किसानों को इससे जोड़ा जा चुका है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025-26 के बजट में व्यापक एवं दूरदर्शी कार्ययोजना की घोषणा की और इसके तहत दो लाख 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया। इसमें राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत दो लाख 25 हजार किसानों को केंद्र सरकार 60 तो राज्य सरकार 40 प्रतिशत का योगदान दे रही है। इसके अलावा 25 हजार किसानों को राज्य सरकार की ओर से शत् प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जा रही है।

प्राकृतिक खेती को संगठित रूप से लागू करने के लिए 125 किसानों के 50 हेक्टेयर क्षेत्र में एक कलस्टर का गठन किया गया है। योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दो हजार कलस्टर बनाये गये हैं। मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किसानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उदयपुर के प्राकृतिक खेती केंद्र द्वारा विभागीय अधिकारियों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं किसान मास्टर ट्रेनरों को भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

चयनित कलस्टरों में किसानों में जागरुकता के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक कलस्टर में किसानों के साथ समन्वय के लिए कृषि सखी एवं सीआरपी की नियुक्ति की गई है। इन कृषि सखियों को कृषि विज्ञान केंद्रों के द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिससे वे किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकें।

प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चयनित किसानों को प्रति एकड़ चार हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों (डीबीटी) के माध्यम से दी जा रही है। यह राशि ऑन-फार्म इनपुट उत्पादन इकाइयों के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि स्थानीय स्तर पर किसानों को प्राकृतिक उर्वरक एवं जैविक आदानों की आसानी से उपलब्धता हो। इसके लिए कृषि विभाग बायो इनपुट संसाधन केंद्र भी बना रहा है। कार्ययोजना के तहत प्रत्येक बायो इनपुट संसाधन केंद्र के लिए एक लाख रुपये का प्रावधान है ताकि स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक उर्वरक तैयार हो सके। अब तक 180 बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित हो चुके हैं।

राज्य सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और सतत् कृषि विकास की दिशा में राज्य को एक नई पहचान दिलाएगी।

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