जयपुर , सितंबर 13 -- किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि राजस्थान में मूंग अनाज मंडियो में आना आरंभ हो गया लेकिन इसकी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद आरंभ नहीं होने से उत्पादक किसानों को एक क्विंटल पर 1280 से लेकर 3200 रुपए तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।

श्री जाट ने रविवार को जारी अपने बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि अभी तक करीब 45 हजार क्विंटल मूंग किशनगढ़, केकड़ी एवं मेड़ता की अनाज मंडियो में ही आ चुका है। एक क्विंटल पर 3200 रुपए के अनुसार किसानों को अब तक लगभग छह करोड़ 60 लाख से लेकर 14 करोड़ 40 लाख रुपए का घाटा हो चुका है। सरकार ने मूंग का एमएसपी मूल्य 8780 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है,जबकि मंडियों में एक क्विंटल के दाम 5500 से लेकर 7500 रुपए तक ही प्राप्त हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले अनेक वर्षों से किसानो की ओर से मूंग की खरीद एक सितंबर से आरंभ करने के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकारों तक को ज्ञापन दिए गए हैं।सरकार से हुई वार्ताओं में भी अनुनय-विनय किया गया है वहीं नेफेड द्वारा पिछले वर्षों के मूंगो का भंडारण से 6500 रुपए प्रति क्विंटल में बेचा जा रहा है, जो घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से 2280 रुपए प्रति क्विंटल कम है, इस कारण मूंगों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का यह कदम किसानों को पूरे घाटे के लिए उत्तरदायी है।

श्री जाट ने कहा कि सरकार किसानों को समृद्ध बनाने के लिए निरंतर घोषणा तो करती रहती है लेकिन उसके द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद आरंभ नहीं करने से उत्पादक किसानों को घोषित एमएसपी भी प्राप्त नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भावांतर भुगतान योजना भी घोषित की हुई है, जिसके द्वारा भी मंडियों में एमएसपी से कम भाव मिलने पर उत्पादक किसानों के लिए घाटे की भरपाई का प्रावधान किया हुआ है। सरकार के पास एक से अधिक विकल्प होते हुए भी किसानों को घोषित एमएसपी से भी वंचित होना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य की डबल इंजन सरकार होते हुए भी किसानों को मूंगों के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित होना पड़ रहा है।

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