उदयपुर , जुलाई 08 -- राजस्थान में आबकारी विभाग ने राज्य सरकार की मुखबिर प्रोत्साहन योजना के तहत कई वर्षों से लंबित 30 मामलों का निस्तारण करते हुए अनुमानित 18 लाख रुपए की राशि की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने बुधवार को बताया कि इससे राज्य में मुखबिर तंत्र सुदृढ़ होगा एवं अवैध मदिरा के निर्माण, भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय की रोकथाम में सहायता मिलेगी।
श्री मेहता ने इस संबंध में की गयी समीक्षा के बाद राज्य में 10 जिलों के 30 मामलों का अल्प अवधि में ही निस्तारण कर दिया गया।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आबकारी विभाग में मुखबिर प्रोत्साहन योजना के वर्षों से लंबित प्रकरणों के अल्प अवधि में निस्तारण से मुखबिर लाभान्वित हुए है जिससे अवैध मदिरा संबंधी विश्वसनीय सूचनाओं की वृद्धि हुई है। राज्य में अप्रैल से जून तक आबकारी विभाग ने प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए छह करोड़ 63 लाख रूपए की अवैध मदिरा सीज की है। गत वर्ष इसी अवधि में निरोधात्मक कार्यवाहियों के तहत एक करोड़ 80 लाख रूपए की अवैध मदिरा सीज की गई थी। इस प्रकार साढे़ तीन गुना से अधिक अवैध मदिरा सीज करने की सफलता मिली है।
मुखबिर प्रोत्साहन योजना के तहत श्रीगंगानगर, अलवर, डूंगरपुर, उदयपुर, सीकर, अजमेर, राजसमन्द, चुरू, बीकानेर, झुंझुंनू जिलों के कई वर्षाें से लंबित चल रहे मामलों में विभाग को अवैध मदिरा के संबंध मेें गोपनीय सूचना देने वाले मुखबिरों को अनुमानित 18 लाख रूपए की राशि की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
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