जयपुर , जुलाई 31 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने कहा है कि राजस्थान भक्ति और शक्ति का आत्मीयता भरा प्रदेश है और यहां के लोगों से उन्हें निरंतर प्यार मिला है तथा राजस्थान की संस्कृति, यहां की भाषा और लोगों के मध्य यह दो वर्ष कैसे बीत गए पता ही नहीं चला।
श्री बागडे ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल को आज लोकभवन में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में स्मरण करते हुए कहा कि यह दो वर्ष 'सहकार से सिद्धि के रूप में सबको साथ लेकर चलते हुए सबके आलोक का रहा हैं।
श्री बागडे ने राजस्थान में 22 वें राज्यपाल के रूप में 31 जुलाई 2024 को पदभार ग्रहण किया था। दो वर्षों के अपने कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश में उच्च शिक्षा के तहत विश्वविद्यालयों के नैक एक्रीडिएशन की पहल की। विश्वविद्यालयों में प्रवेश, परीक्षाएं, परीक्षा परिणाम और दीक्षांत समारोह समय पर आयोजित किये जाने को सुनिश्चित किया और नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परम्परा से नई पीढ़ी को जोड़ने के साथ ही रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ करवाने के साथ ही विश्वविद्यालयो के वित्तीय और नैतिक कार्यों से जुड़े अंकेक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनमें गुणात्मक सुधार की अभूतपूर्व पहल की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालया में किसी भी स्तर पर अनियमितताओं, गैर जिम्मेदारी से कार्य और नियुक्तियों में किसी भी प्रकार की शिकायतों पर त्वरित कार्यवाहियां भी की।
पदभार ग्रहण के बाद से ही उन्होंने पहले वर्ष राजस्थान के 'अभ्युदय की ओर' तथा इस दूसरे वर्ष 'सहकार से सिद्धि' के अंतर्गत आलोक पथ का अनुगामी बनते प्रदेश के विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की पहल उन्होंने की। वहां मौलिक शोध और पेटेंट के लिए प्रोत्साहन की नीति पर कार्य किया। प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षाएं, पाठ्यक्रमों को समयबद्ध पूर्ण करने और समय पर परिणाम जारी करने के उनके निर्देर्शाें से ही निर्धारित समयबद्ध कैलेण्डर के तहत विश्वविद्यालय की कार्यपद्धति प्रारंभ हुई है। जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए वे स्वयं सभी जिलों में निरंतर गए और केन्द्र और राज्य सरकार की उनके लिए लाभकारी योजनाओं का बारीकी से मूल्यांकन कर यह सुनिश्चित किया कि जनजातीय समुदाय को समय पर और प्रभावी रूप में योजनाओं का लाभ मिले।
पिछले वर्ष उन्होंने राजस्थान के प्रत्येक जिले में स्वयं जाकर वहां केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बैठकें ली। इस वर्ष उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में स्वयं पहुंचकर उनकी सतत मोनिटरिंग करते हुए उनकी छोटी से छोटी समस्याओं का समाधान नहीं करवाया बल्कि वित्तीय अंकेक्षण करते हुए पारदर्शिता के साथ उच्च शिक्षा के गुणात्मक प्रसार को सुनिश्चित किया। जनजातीय क्षेत्रों के प्रभावी विकास के लिए स्वयं आदिवासी जिलों में पहुंचकर वहां योजनाओं की सूक्ष्म समीक्षा बैठकें ली और जनजातीय उत्पादों के विपणन की कारगर नीति पर कार्य करने के निर्देश दिए। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लुप्त कलाओं के संरक्षण के साथ राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों के देश-विदेश में प्रभावी विपणन की नीतियां बनाकर शिल्प ग्राम उत्सवों में कारीगरों, शिल्पकारों, कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए निंरतर कार्य किया।
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