जयपुर , अप्रैल 26 -- राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार (जीआईटीबी) के माध्यम से निवेश, रोजगार और वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देते हुए प्रदेश सरकार को राजस्थान को एक वर्ल्ड-क्लास टूरिज़्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए कहा है कि जीआईटीबी केवल एक पर्यटन आयोजन नहीं बल्कि साझेदारी, विस्तार और वैश्विक अवसरों के लिए उपयुक्त मंच है।
श्रीमती दिया कुमारी ने रविवार को यहां द ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार के 15वें संस्करण के उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसके 15वें संस्करण के साथ राजस्थान की पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती नेतृत्व क्षमता और भारत की वैश्विक भागीदारी और मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'विकसित भारत 2047' के विज़न के अनुरूप पर्यटन आज विकास, रोजगार और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रमुख आधार बन चुका है, और राजस्थान में यह लाखों लोगों की आजीविका से जुड़कर समावेशी आर्थिक विकास को गति दे रहा है। ।
उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में पर्यटन को 'ग्रोथ इंजन' के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें पारदर्शी प्रशासन, निजी निवेश और सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता दी गई है। उदयपुर की झीलों, थार के रेगिस्तान, जयपुर और चित्तौड़गढ़ के किलों, प्रमुख यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स, वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन्स और 660 से अधिक हवेलियों के संरक्षण जैसे प्रयासों के साथ राजस्थान अनुभव-आधारित पर्यटन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एमआईसीई, फिल्म और स्पिरिचुअल टूरिज़्म के विस्तार के साथ राज्य को वर्षभर सक्रिय पर्यटन गंतव्य बनाया जा रहा है।
इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि "राजस्थान आज केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के कारण ही नहीं, बल्कि निवेश-अनुकूल नीतियों, सरल प्रक्रियाओं, समयबद्ध निर्णय व्यवस्था और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण एक आकर्षक, वर्षभर सक्रिय पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। हेरिटेज टूरिज़्म, डेज़र्ट सर्किट्स, वाइल्डलाइफ एक्सपीरियंस, वेलनेस, फेथ-बेस्ड ट्रैवल, रूरल और इको-टूरिज़्म जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग और निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। बेहतर रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी, पीपीपी-आधारित पहल और डिजिटल सिस्टम्स के माध्यम से पर्यटन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
श्री श्रीनिवासने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यटन को रोज़गार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनाना है।"केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक सुमन बिल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत भारत का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में पर्यटन के जीडीपी में योगदान को 5.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक ले जाने का है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, और देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 से हवाई अड्डों की संख्या 75 से बढ़कर 150 हो गई है और रेल नेटवर्क में भीउल्लेखनीय 2014 से 2025 के बीच घरेलू पर्यटकों के आगमन की संख्या 1.5 बिलियन से बढ़कर 4 बिलियन तक पहुंच गई हैं, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या भी दोगुनी वृद्धि के साथ 10 मिलियन से 20 मिलियन तक पहुंची है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक क्षमता पर जोर देते हुए उन्होंने होटल क्षमता को दोगुना करने, विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के विकास और उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, उन्होंने कहा कि जीआईटीबी छोटे हितधारकों को बड़े वैश्विक भागीदारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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