जयपुर , फरवरी 07 -- राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने प्रदेश की मंडियों की गिरती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आगामी बजट में राहत की मांग रखते हुए कहा है कि 'यूजर चार्ज' लागू होने के बाद से गैर-अधिसूचित कृषि जिंसों के व्यापारियों ने मंडियों से बाहर जाकर व्यापार करना शुरू कर दिया है, जिससे मंडियां वीरान होने लगी हैं।
श्री गुप्ता के अनुसार, मंडियों की रौनक बनाए रखने के लिए पशु आहार, दाल, चावल, तेल और मसालों जैसे उत्पादों की उपलब्धता वहां बनी रहनी चाहिए, क्योंकि किसान अपनी फसल बेचने के बाद वहीं से अपनी जरूरत का सामान खरीदते हैं और शहरी जनता को भी वहां रियायती दरों पर वस्तुएं प्राप्त होती हैं।
व्यापारिक सुगमता के लिए संघ ने राज्य सरकार से विशेष एमनेस्टी (माफी) योजनाएं लाने का आग्रह किया है। इसमें मुख्य रूप से वैट पर बकाया ब्याज और पेनल्टी की माफी, कृषि मंडियों में भूखंड आवंटन की शेष राशि पर ब्याज राहत, और स्टाम्प ड्यूटी पर ब्याज माफी योजना शामिल है। व्यापारियों का तर्क है कि इन योजनाओं से न केवल व्यापारियों का वित्तीय बोझ कम होगा, बल्कि सरकार के पास भी लंबित राजस्व जमा हो सकेगा और कानूनी जटिलताओं में कमी आएगी।
प्रदेश के उद्योगों, विशेषकर तेल, दाल, आटा और मसाला मिलों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि इन मिलों को अपनी क्षमता के अनुसार संचालन के लिए 60-70 प्रतिशत कच्चा माल अन्य प्रांतों से मंगाना पड़ता है, जिस पर संबंधित राज्यों में पहले ही कर चुकाया जा चुका होता है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा दोबारा मंडी सेस मांगना अनुचित है। साथ ही, राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली छूट का लाभ सभी प्रकार की कच्चे माल की खरीद पर प्रभावी होना चाहिए, चाहे वह स्थानीय मंडी से हो या बाहर से।
संघ ने मंडी शुल्कों के सरलीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ठोस सुझाव देते हुए कहा गया है कि सभी जिंसों पर कृषि मंडी सेस को एक समान एक प्रतिशत की दर पर लाया जाए और आड़त की दर सवा दो फीसदी निर्धारित की जाए। इसके अतिरिक्त, किराए की दुकानों को 25 प्रतिशत डीएलसी दर पर मालिकाना हक देने, व्यापार मंडलों को कार्यालय हेतु रियायती दरों पर भूमि आवंटित करने और धनिये पर मंडी टैक्स को घटाकर 50 पैसे प्रति सैकड़ा करने की मांग की गई है। साथ ही, सरसों और सोयाबीन के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को बीज एवं बिजली पर पचास फीसदी सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा गया है।
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