नयी दिल्ली , जून 29 -- राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में सोमवार को यहां एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये जिससे दोनों राज्यों में पानी से जुड़ी तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान हो जायेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह , राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल और केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्री शाह ने कहा कि इस समझौते से हरियाणा और राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी समस्या का आज समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और यह इस बात का प्रमाण है कि अगर राज्य सहकारी संघवाद की सोच को आगे बढ़ाएं तो तीन दशक पुरानी समस्या का भी आसानी से समाधान हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत यमुना नहर से जुलाई से अक्टूबर तक तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिये लगभग 580 घन मीटर पानी राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन तीन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से भी अधिक है जिनके माध्यम से राजस्थान और हरियाणा राज्यों के लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए फायदे का सौदा है। समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन और जल छोड़ने के प्रोटोकॉल और रखरखाव का बारीकी से ध्यान रखा गया है। इस वैज्ञानिक रूप से परिपूर्ण समझौते में बुनियादी ढांचे का संचालन, रखरखाव, निगरानी तंत्र, पारदर्शिता के उपायों और विवाद समाधान की प्रक्रिया को भी बहुत बढ़िया तरीके से समाहित किया गया है।

इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान को उसके हिस्से का पानी पहुँचाना है। इससे राज्य, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा। यह समझौता केन्द्र सरकार और समझौते में शामिल राज्य सरकारों के एकजुट प्रयासों से परियोजना को समय पर लागू करने की नींव रखने का काम करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और विशेषकर केन्द्रीय जल आयोग ने इस समझौते का जो प्रारूप बनाया है वह आने वाले कई दशकों तक निर्विवाद समझौते के रूप में स्थापित रहेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री पाटिल की अध्यक्षता में कुछ ही दिनों में इस समस्या का समाधान निकल गया। इस समझौते के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पीने का पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो जाएगी।

श्री शाह ने कहा कि इस समझौते से राजस्थान और हरियाणा, विशेषकर राजस्थान, में पीने के पानी की समस्या के निवारण में बहुत सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो पानी किसी काम नहीं आ रहा था, इस समझौते के बाद अब वह पानी लोगों की प्यास बुझाने और बड़े तालाबों में संचयित होकर भूजलस्तर बढ़ाने के काम आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और जल शक्ति मंत्रालय ने सरकार के सहकारी संघवाद के संदेश को सच्चे अर्थों में चरितार्थ किया है।

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