चंडीगढ़ , मार्च 30 -- पंजाब लोक भवन में राजस्थान एवं ओडिशा स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में अपनी पत्नी श्रीमती अनीता कटारिया के साथ उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने दोनों राज्यों के नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजस्थान अपनी वीरता और शौर्य के लिए प्रसिद्ध है, जबकि ओडिशा अपनी भक्ति और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य भारत की साझा सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। उन्होंने 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बेहतर समझ और एकता को बढ़ावा देते हैं।

राजस्थान की प्रस्तुति में आईपीएस अधिकारी सुश्री गीतांजलि खंडेलवाल का संबोधन शामिल था, जिसके बाद "डेजर्ट सिम्फनी" के माध्यम से पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी गई। अंगी गेर, भावल, कथक, सेहरिया स्वांग, घूमर और कालबेलिया जैसे लोक एवं शास्त्रीय नृत्यों ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया।

ओडिशा की प्रस्तुति में डॉ. आर. के. राठू का संबोधन, संबलपुरी लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति तथा श्री शनि धनुक द्वारा राज्यपाल का लाइव पोर्ट्रेट चित्रण विशेष आकर्षण रहा। इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने मानवता का संदेश देते हुए लोगों से अहंकार और क्रोध से ऊपर उठने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानवता की भावना भारत की मिट्टी में रची-बसी है। महावीर जयंती के संदर्भ में उन्होंने भगवान महावीर की शिक्षाओं क्षमा, अहिंसा और सद्भाव का उल्लेख किया। राजस्थान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह राज्य अपने समृद्ध इतिहास, भव्य किलों, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, व्यंजनों और अतिथि सत्कार के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कालीबंगा, चित्तौड़गढ़ और आमेर किले जैसे ऐतिहासिक स्थलों तथा घूमर और कालबेलिया जैसे प्रसिद्ध नृत्यों का उल्लेख किया।

ओडिशा के बारे में उन्होंने कहा कि राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत है। उन्होंने कलिंग की धरोहर, जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिसी नृत्य, जनजातीय परंपराएं, साहित्य, जैव विविधता और स्वतंत्रता संग्राम एवं आर्थिक विकास में राज्य की भूमिका को रेखांकित किया।

राज्यपाल ने कहा कि स्थापना दिवस जैसे कार्यक्रम राज्यों के बीच पारस्परिक सम्मान और समझ को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में निहित है और ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने नागरिकों से दोनों राज्यों की समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेकर सशक्त और प्रगतिशील भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

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