जयपुर , मई 30 -- राजस्थान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का ग्राफ बढ़ने लगा है और प्रदेश में राज निवेश पोर्टल पर 67.7 प्रतिशत की स्वीकृति दर से प्राप्त नौ हजार दस आवेदनों में से छह हजार 103 की स्वीकृति के साथ उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

मुख्य सचिव कार्यालय के तहत गठित 'डी-रेग्यूलेशन सेल' के अप्रैल महीने की रिपोर्ट के अनुसार यह उल्लेखनीय प्रगति सामने आई है और इस अवधि के दौरान प्रदेश में जयपुर जिले का प्रदर्शन अव्वल रहा है।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के अनुसार कि राजस्थान 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देते हुए 'डी रेग्यूलेशन फेज प्रथम' के तहत विकसित राजस्थान और राइजिंग राजस्थान की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। राज निवेश पोर्टल एवं निरंतर सुधारात्मक प्रयासों के जरिए प्रदेश एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के तौर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है।

श्री श्रीनिवास ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रक्रियाओं के सरलीकरण, आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे है, जिनके अनवरत सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। राज निवेश पोर्टल के माध्यम से राज्य के प्रमुख निवेश केंद्रों के साथ-साथ छोटे जिलों में भी व्यापक स्तर पर प्रकरणों का निस्तारण और स्वीकृतियां जारी की जा रही हैं।

'इंवेस्टर फ्रैंडली एप्रोच' के साथ सतत संपर्क, समन्वय और विकेन्द्रीकृत क्रियान्वयन की बदौलत राजस्थान 'डी रेग्यूलेशन फेज प्रथम में अनवरत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

प्रगति रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तरीय प्रगति में राज निवेश पोर्टल पर प्राप्त हुए आवेदेनों में स्वीकृति दर 67.7 प्रतिशत रही। जिला-वार प्रदर्शन में जयपुर अग्रणी जिला रहा जहां एक हजार 932 आवेदन प्राप्त हुए तथा एक हजार 351 आवेदन स्वीकृत किए गए। इसके अतिरिक्त जोधपुर, सीकर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, हनुमानगढ़, अलवर, चूरू और भीलवाड़ा जैसे प्रमुख शहरी एवं औद्योगिक जिलों ने भी राज निवेश पोर्टल पर उल्लेखनीय सहभागिता दर्ज की है।

इसके अतिरिक्त प्रमुख जिलों में कोटा और हनुमानगढ़ में उच्च निस्तारण दक्षता प्रदर्शित करते हुए क्रमशः लगभग 83.8 प्रतिशत और 82.5 प्रतिशत की स्वीकृति दर की उपलब्धि हासिल की है। वहीं बारां, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, टोंक, उदयपुर और जालोर जिलों में 70 प्रतिशत से अधिक स्वीकृति दर दर्ज की गई, जो जिलों की प्रशासनिक दक्षता तथा सेवा वितरण में सुधार को रेखांकित करती है।

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