, April 15 -- सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले में तारापुर के लखनपुर गांव में हुआ था। श्री चौधरी का शुरुआती नाम राकेश चौधरी था, जिसे बाद में उन्होंने बदल कर सम्राट चौधरी कर दिया। पिता शकुनी चौधरी कुशवाहा समाज के बड़े चेहरे और प्रदेश के कद्दावर नेताओं में एक रहे हैं। शकुनी चौधरी पहली बार 1985 में तारापुर सीट से विधायक बने थे। यह वही साल था जब नीतीश कुमार भी पहली बार हरनौत से विधानसभा चुनाव जीते थे। शकुनी चौधरी इसके बाद सात बार विधायक और एक बार सांसद बने। 1998 में जब श्री चौधरी खगड़िय लोकसभा सीट से सांसद बने तब उनकी पारंपरिक तारापुर सीट से उनकी पत्नी और सम्राट चौधरी की माता पार्वती देवी विधायक बनी।
सम्राट चौधरी की राजनीतिक शिक्षा अलग अलग हस्तियों के साथ हुई। 1990 में राजनीति में प्रवेश के बाद सन 2014 में राष्ट्रीय जनता दल छोड़ने से पहले उन्होंने काफी लंबा समय लालू प्रसाद के साथ गुजारा। श्री प्रसाद के साथ राजनीति की स्कूलिंग के बाद उन्होंने आगे के चार वर्ष नीतीश कुमार के साथ गुजरे और उसके बाद भाजपा की राजनीतिक भठ्ठी में तप कर कुंदन बन गए।
नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में आने के बाद 2014 में वह विधानपरिषद के सदस्य बने, जबकि अगले टर्म 2020 में उनको भाजपा ने विधानपरिषद में भेजा।
2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 74 और जदयू को सिर्फ 43 सीटें मिली। बावजूद इसके मुख्यमंत्री का पद नीतीश कुमार के पास ही रहा। राजनीतिक पंडितों ने कहा कि भाजपा के पास आक्रामक नेतृत्व की कमी है। फिर क्या था, भाजपा ने बिहार के अनुकूल जातीय समीकरण के साथ एक आक्रामक नेता की खोज शुरू की।
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