, Feb. 26 -- गृहमंत्री ने कहा कि एसएसबी पहले स्पेशल सर्विस ब्यूरो के नाम से जाना जाता था और उसे भारत के सीमावर्ती गांवों की सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने कहा कि स्व. अटल बिहारी की सरकार के कार्यकाल में भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसएसबी को सौंपी गई थी। वर्ष 2001 में 1,751 किलोमीटर लंबी खुली भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा का दायित्व एसएसबी को दी गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में 699 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एसएसबी को सौंपी गई।
श्री शाह ने कहा कि एसएसबी के जवानों ने हमेशा कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा की है और सीमावर्ती गांवों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की भलाई का भी ध्यान रखा है।उन्होंने कहा कि देश के दुश्मन या भारत को नुकसान पहुंचाने की मंशा से सीमाओं के रास्ते प्रवेश करने का प्रयास करेंगे, इसलिए एसएसबी को सदैव सतर्क रहने के साथ अपने खुफिया तंत्र को मजबूत बनाए रखना होगा।
गृहमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा के साथ-साथ एसएसबी को तस्करी, मादक पदार्थों और अन्य अवैध गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसएसबी को सभी संभावित खतरों का आकलन करने में सक्षम एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुली सीमाओं की सुरक्षा के दौरान सीमा प्रबंधन के कई नए आयामों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 'वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम-1' और 'वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम-2' के माध्यम से गांवों की स्थिति में व्यापक सुधार लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता है कि हमारे जवानों और उनके परिवारों को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
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