उदयपुर , मई 15 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 'बाबोसा' के नाम से विख्यात पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के व्यक्तित्व को लोकतंत्र का चलता-फिरता विश्वविद्यालय बताते हुए कहा है कि वह राजनीति के अजातशत्रु थे।

श्री शेखावत ने शुक्रवार को यहां उदयपुर शहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा फतेहसागर लेक स्थित पूर्व उपराष्ट्रपति शेखावत की प्रतिमा पर उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित विशेष श्रद्धांजलि सभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बाबोसा का जीवन हमें सिखाता है कि यदि समर्पण सच्चा हो और विचार शुद्ध तो एक सामान्य व्यक्ति भी सफलता के शिखर पर पहुंचकर देश की सेवा कर सकता है।

उन्होंने श्री भैरों सिंह शेखावत के प्रारंभिक जीवन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि सीकर जिले के छोटे से गांव खाचरियावास के एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्मे बाबोसा ने अभावों के बीच भी कभी अपने लक्ष्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक इकलौते बड़े बेटे के रूप में, जिसके पास खेती के लिए मात्र डेढ़ एकड़ जमीन थी, उन्होंने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुलिस सब-इंस्पेक्टर की नौकरी से अपना जीवन शुरू करने वाले बाबोसा ने 1952 के पहले विधानसभा चुनाव के दौरान लोकसेवा के लिए अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी को त्याग दिया। एक साधारण परिवार के युवक के लिए वह निर्णय कितना कठिन और साहसिक रहा होगा, इसकी कल्पना मात्र ही हमें रोमांचित कर देती है। उन्होंने तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके त्याग में ही उनके विराट व्यक्तित्व की नींव छिपी थी।

उन्होंने राजस्थान में भाजपा की मजबूती का श्रेय पूर्व उपराष्ट्रपति शेखावत को दिया। उन्होंने कहा कि आज राजस्थान में भाजपा का जो विशाल कुनबा और वटवृक्ष दिखाई देता है, उसे बाबोसा ने अपने पसीने और खून से सींचा है। जनसंघ के कालखंड से लेकर भाजपा की स्थापना तक, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कार्यकर्ताओं को जोड़ा और संगठन को खड़ा किया। केंद्रीय मंत्री ने उनके व्यक्तित्व की एक अनूठी विशेषता बताते हुए कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति जैसे उच्च पदों पर रहने के बाद भी अहंकार उन्हें छू तक नहीं पाया।

उन्होंने कहा कि रिश्तों को निभाने की उनकी अद्भुत क्षमता ने उन्हें राजनीति में 'अजातशत्रु' बना दिया था। आज भी पक्ष और विपक्ष के कई बड़े नेताओं की कार्यशैली पर बाबोसा की स्पष्ट छाप देखी जा सकती है। श्रद्धांजलि सभा में उदयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, सांसद मन्नालाल रावत सहित जिले के सभी प्रमुख पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।

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