, March 18 -- श्रीमती अंजुम आरा ने कहा कि मदरसा शिक्षा के क्षेत्र में जो ऐतिहासिक सुधार हुए, वे बिहार के सामाजिक परिवर्तन की मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि मदरसों को मान्यता देना, मदरसा शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के समकक्ष वेतनमान उपलब्ध कराना और आधुनिक पाठ्यक्रम लागू करना, ये ऐसे कदम थे जिन्होंने हजारों छात्र-छात्राओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा। इससे न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ, बल्कि अल्पसंख्यक समाज के बच्चों के लिए अवसरों के नए द्वार भी खुले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार ने यह साबित किया कि परंपरा और आधुनिकता को साथ लेकर चलना ही सच्चे विकास का मार्ग है।

जदयू नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार ने अल्पसंख्यक बेटियों के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि 'हुनर' जैसे अभिनव कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों अल्पसंख्यक लड़कियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया। अल्पसंख्यक युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी नीतीश सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि 20 हजार से अधिक युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के योग्य बनाया गया। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सैंकड़ों पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया सुनिश्चित कर यह स्पष्ट किया गया कि सरकार अवसरों की समान भागीदारी में विश्वास रखती है।

श्रीमती अंजुम आरा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार ने अल्पसंख्यकों के लिए तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर सशक्तिकरण की नई परिभाषा गढ़ी है। उनके नेतृत्व में बिहार ने यह दिखाया है कि जब नीयत साफ हो, नीति समावेशी हो और नेतृत्व संवेदनशील हो, तब समाज का हर वर्ग विकास की धारा में बराबरी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की जो प्रगति बीते 20 वर्षों में बिहार में देखने को मिली है, वह राज्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज रहेगी।

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