बेंगलुरु , जून 06 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक तनाव को कम करने की कोशिश करते हुए कहा है कि दोनों पक्षों को राजनीतिक टकराव के बजाय विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
श्री शिवकुमार ने यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस टिप्पणी का जवाब देते हुए कही, जिसमें (श्री मोदी) ने कहा था कि सरकार के प्रति जनता की बढ़ती नाराजगी के कारण कांग्रेस को कर्नाटक में अपना मुख्यमंत्री बदलना पड़ा। उन्होंने बधाई संदेश के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
श्री शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, "उन्होंने मुझे शुभकामनाएं दी हैं और मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। मैं उनसे जाकर मिलूंगा। हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए और उन्हें भी राजनीति नहीं करनी चाहिए। आइए, विकास के मुद्दों पर सहयोग करें।"मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक के हित उनकी प्राथमिकता रहेंगे और संकेत दिया कि वह राज्य में अहम विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र का सहयोग मांगेंगे।
मुख्यमंत्री का बयान श्री मोदी के उस भाषण के एक दिन बाद आए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री ने सूरत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला किया था। श्री मोदी ने दावा किया था कि राज्य सरकार के खिलाफ बढ़ते जन-आक्रोश के कारण कांग्रेस को कर्नाटक में अपना नेतृत्व बदलना पड़ा। श्री मोदी ने कहा था, "बिखरती हुई कांग्रेस की राजनीति और खुद पैदा की गयी अराजकता में मौके तलाशने की कोशिशें काम नहीं आएंगी। कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा है। इसीलिए कांग्रेस को अपना मुख्यमंत्री बदलना पड़ा।"श्री शिवकुमार ने सुलह का रुख अपनाया और कहा कि तीन जून को कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद श्री मोदी ने उन्हें बधाई दी थी और लोगों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग का भरोसा दिलाया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब नयी बनी कांग्रेस सरकार स्थिरता दिखाने की कोशिश कर रही है। हाल ही में पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिसमें वरिष्ठ मंत्री आर. रामलिंगा रेड्डी द्वारा विभागों के बंटवारे पर असंतोष जताना भी शामिल था। शनिवार को शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि पार्टी के भीतर सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है और उन्हें पार्टी के आंतरिक मामले बताया।
अनुभवी मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की जगह लेने के बाद, शिवकुमार के सामने अब पार्टी की उम्मीदों को पूरा करने, कैबिनेट में एकजुटता बनाए रखने और शासन से जुड़े वादों को पूरा करने की चुनौती है। साथ ही, उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के साथ राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण संबंधों को भी संभालना है। राजनीतिक विश्लेषक मुख्यमंत्री के इस कदम को अपने प्रशासन को विकास-उन्मुख और सहकारी संघवाद पर केंद्रित दिखाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं, भले ही राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक मतभेद हैं।
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