विशाखापत्तनम , फरवरी 19 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुरक्षित भविष्य के लिए नौसेनाओं के बीच सहयोग बढाने पर जोर देते हुए कहा है कि कोई भी नौसेना भले ही वह कितनी भी सक्षम क्यों न हो समुद्र में उभर रही नयी चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती। श्री सिंह ने गुरुवार को यहां नौसेना के 'मिलन अभ्यास' के उद्घाटन समारोह के दौरान 74 देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना में नौसेनाओं की भूमिका बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में आर्थिक वृद्धि के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार और परिवहन में भारी वृद्धि के कारण जलडमरूमध्य और समुद्री मार्गों के स्वामित्व को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, जिससे कभी-कभी तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि समुद्र के भीतर संसाधनों, विशेषकर दुर्लभ मृदा खनिजों पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी तनाव का नया आयाम जोड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, समुद्री क्षेत्रों को आतंकवादी गतिविधियों से सुरक्षित रखने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खतरों के अलावा समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मत्स्यन, तस्करी, साइबर कमियों तथा महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान की नयी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ रही हैं जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की आवृत्ति और जटिलता बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कि कोई भी नौसेना, चाहे कितनी ही सक्षम क्यों न हो, इन चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती इसलिए सुरक्षित भविष्य के लिए नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना आवश्यक है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल से संबंधित मामलों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि की सुदृढ़ कानूनी रूपरेखा को व्यापक वैश्विक नौसैनिक संरचना के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संधित विवाद समाधान और राष्ट्रों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक व्यापक और समय-परीक्षित तंत्र प्रदान करती है, तथा वैश्विक नौसैनिक संरचना सूचना साझा करने, संचार संपर्कों की सुरक्षा, उच्च समुद्रों में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने और वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा में सहायक होगी।

श्री सिंह ने कहा कि स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है और मिलन जैसे मंच पेशेवर विशेषज्ञता को साथ लाकर आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं, पारस्परिक संचालन क्षमता को बढ़ाते हैं तथा साझा चुनौतियों के समन्वित समाधान को सक्षम बनाते हैं। उन्होंने कहा ," जब हमारे जहाज साथ चलते हैं, हमारे नाविक साथ प्रशिक्षण लेते हैं और हमारे कमांडर साथ विचार-विमर्श करते हैं, तब हम भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं से परे साझा समझ विकसित करते हैं।"रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने लंबे समय से इस सहयोग की आवश्यकता को पहचाना है। क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, समुद्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण अब क्षेत्रों के पार सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति की परिकल्पना में विकसित हुआ है। यह परिवर्तन भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ गहन प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

श्री सिंह ने 74 देशों की भागीदारी वाले मिलन अभ्यास को भारत पर वैश्विक समुद्री समुदाय के विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मिलन 2026 का उद्देश्य सहभागी देशों की नौसेनाओं के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता को बढ़ाना, पेशेवर अनुभवों और प्रथाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से दक्षता में सुधार करना तथा परस्पर लाभकारी संबंधों को गहरा करना है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित न्यायसंगत समुद्री व्यवस्था स्थापित करना चाहता है।

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