राजनांदगांव , मई 23 -- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में शासकीय धान खरीदी में 52 लाख रुपये से अधिक के धान गबन का मामला सामने आया है। डोंगरगढ़ विकासखंड के बागरेकसा धान उपार्जन केंद्र में जांच के दौरान 1696.06 क्विंटल धान की कमी पाए जाने पर प्रशासन ने समिति प्रबंधक, डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बागरेकसा में औचक निरीक्षण कर रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्र द्वारा कुल 65,627.60 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। इसमें से 29,501.46 क्विंटल धान राइस मिलर्स तथा 34,430.08 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों को भेजा गया।

ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1,696.06 क्विंटल धान शेष दर्शाया गया था, जिसकी कीमत 52 लाख 57 हजार 786 रुपये आंकी गई है। हालांकि भौतिक सत्यापन के दौरान केंद्र परिसर में एक भी बोरी धान नहीं मिली।

जांच में केंद्र प्रभारी नीलकंठ साहू और डाटा एंट्री ऑपरेटर ओम कुमार यादव ने धान की कमी को 'सूखत' बताया, लेकिन धर्मकांटा की वास्तविक वजन पर्चियों और कंप्यूटर मॉड्यूल की प्रविष्टियों के मिलान में बड़े पैमाने पर हेराफेरी सामने आई। आरोप है कि राइस मिलर्स को भेजे गए धान के परिवहन में प्रत्येक बोरी में काल्पनिक रूप से दो किलोग्राम तक वजन कम दर्ज कर रिकॉर्ड में धान की कमी दिखाई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि 875 बोरियों वाले वाहनों में 17.50 क्विंटल, 800 बोरियों वाले वाहनों में 16 क्विंटल, 700 बोरियों वाले वाहनों में 14 क्विंटल तथा 600 और 500 बोरियों वाले वाहनों में क्रमशः 12 और 10 क्विंटल धान की फर्जी कमी दर्ज की गई थी।

संग्रहण केंद्रों को भेजे गए धान की जावक पर्चियों में वास्तविक वजन दर्ज पाए जाने के बाद अधिकारियों ने इसे सुनियोजित वित्तीय अनियमितता और शासकीय संपत्ति के गबन का मामला माना है।

प्रशासन ने दोषी पाए गए समिति प्रबंधक, डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

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