राजनांदगांव , सितम्बर 25 -- छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी के रूप में पहचान रखने वाले राजनांदगांव में गणेश विसर्जन के दौरान निकलने वाली ऐतिहासिक झांकियों में स्थानीय कारीगरी को प्रोत्साहन देने और बाहर से लाई जाने वाली रेडिमेड झांकियों को नगर निगम की आधिकारिक प्रतियोगिता से अलग रखने की मांग उठी है।
राजनांदगांव की गणेश विसर्जन झांकी परंपरा दशकों पुरानी है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही शहर की झांकियां अपनी कलात्मकता और भव्यता के लिए आसपास के क्षेत्रों में चर्चित रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार एक समय विसर्जन उत्सव में इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे कि व्यवस्था संभालने के लिए अन्य जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ता था। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद भी शहर में यह परंपरा लगातार जारी है।
शहर के वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय कलाकारों का कहना है कि पहले गणेश उत्सव से कई महीने पूर्व ही विभिन्न मोहल्लों में मंडलों के कार्यकर्ता स्थानीय कलाकारों और कारीगरों के साथ झांकियों का निर्माण शुरू कर देते थे। मूर्तिकार, पेंटर, बढ़ई, वेल्डिंग कारीगर तथा साउंड और लाइट से जुड़े तकनीशियन मिलकर अलग-अलग विषयों पर झांकियां तैयार करते थे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में कुछ मंडलों द्वारा पड़ोसी दुर्ग जिले से तैयार झांकियां किराए पर लेने अथवा खरीदकर लाने का चलन बढ़ा है। हालांकि शहर के कई गणेश मंडल अभी भी स्थानीय स्तर पर स्वयं झांकियों का निर्माण कर रहे हैं और अपनी मौलिक प्रस्तुति तथा कारीगरी के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
वरिष्ठजनों के अनुसार एक दौर ऐसा भी था जब राजनांदगांव में तैयार झांकियों को देखने और किराए पर लेने के लिए रायपुर से गणेश मंडलों के प्रतिनिधि यहां पहुंचते थे। राजनांदगांव में विसर्जन के बाद इन झांकियों को रायपुर ले जाकर वहां प्रदर्शित किया जाता था।
स्थानीय कलाकारों का कहना है कि शहर में झांकियों के निर्माण से बड़ी संख्या में कारीगरों को मौसमी रोजगार भी मिलता था। झांकी तैयार करने की प्रक्रिया में मूर्तिकारों, पेंटरों, बढ़ई, वेल्डिंग कारीगरों तथा साउंड-लाइट से जुड़े लोगों को काम मिलता था। बाहर से तैयार झांकियां मंगाने की प्रवृत्ति बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मिलने वाला यह काम प्रभावित हो रहा है।
नगर निगम और विभिन्न संस्थाओं की ओर से विसर्जन के दौरान आकर्षक झांकियों को पुरस्कृत भी किया जाता है। संस्कृति प्रेमियों, स्थानीय कलाकारों और नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि आधिकारिक झांकी प्रतियोगिता में केवल राजनांदगांव नगर सीमा के भीतर स्थानीय मंडलों और कारीगरों द्वारा निर्मित झांकियों को ही पुरस्कार के लिए पात्र माना जाए।
उनका कहना है कि बाहर से लाई गई झांकियों के प्रदर्शन पर रोक लगाने के बजाय उन्हें प्रतियोगिता और पुरस्कार की श्रेणी से अलग रखा जा सकता है। इससे स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं में झांकी निर्माण के प्रति रुचि बढ़ेगी और शहर की पुरानी कलात्मक परंपरा को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
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