बेंगलुरु , अगस्त 30 -- श्री बी नागेंद्र के डीके शिवकुमार मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद भाजपा की प्रस्तावित बल्लारी पदयात्रा को लेकर कर्नाटक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में खींचतान शुरू हो गयी है।
केंद्रीय मंत्री और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के वरिष्ठ नेता एचडी कुमारस्वामी के पदयात्रा के औचित्य पर सवाल उठाने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र को सफाई देनी पड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन सिर्फ पूर्व मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की 10 अलग-अलग नाकामियों के खिलाफ निकाला जा रहा है।
वहीं श्री नागेंद्र के पद छोड़ने और उनका इस्तीफा मंजूर होने के बाद पदयात्रा जारी रखने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि इस मुद्दे पर उनसे कोई चर्चा नहीं की गयी थी।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या मुद्दा उठाया है। मुझसे इस पर कोई बात नहीं हुई है। श्री नागेंद्र इस्तीफा दे चुके हैं। अब अगला कदम क्या है? वे यह पदयात्रा क्यों निकाल रहे हैं?"ये टिप्पणियां इसलिए अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपने अभियान में नागेंद्र प्रकरण को मुख्य मुद्दा बनाया था। अब जबकि श्री नागेंद्र मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं, श्री कुमारस्वामी के सवाल ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व को यह स्पष्ट करने पर मजबूर कर दिया है कि बल्लारी मार्च का असल मकसद क्या है।
श्री विजयेन्द्र ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि श्री नागेंद्र का इस्तीफा इस आंदोलन का केवल एक हिस्सा था।
श्री विजयेन्द्र ने कहा, "किसी भ्रम की गुंजाइश नहीं है। शायद कुछ गलतफहमी हुई है। मैं श्री कुमारस्वामी से बात करूंगा। हम सिर्फ एक नहीं, बल्कि 10 अलग-अलग मुद्दों पर पदयात्रा निकाल रहे हैं।"श्री विजयेन्द्र ने कहा कि उन्होंने श्री कुमारस्वामी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक से बात की है और इस कार्यक्रम के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी भी ले ली है।
इस स्पष्टीकरण ने प्रस्तावित मार्च के दायरे को वाल्मीकि निगम विवाद से बढ़ाकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक अभियान में बदल दिया है।
फिलहाल अमेरिका दौरे पर गये श्री कुमारस्वामी 12 सितंबर को लौटने वाले हैं। उन्होंने पहले ही संकेत दे दिये हैं कि वह पदयात्रा के दौरान मौजूद नहीं रहेंगे।
प्रदेश भाजपा नेतृत्व और उसके वरिष्ठ राष्ट्रीय सहयोगी के बीच विचारों के इस अंतर ने बल्लारी मार्च में एक नया राजनीतिक मोड़ ला दिया है।
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