बैतूल , जुलाई 27 -- मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में नेशनल हाईवे-52 पर 17 गौवंश के ट्रक की चपेट में आने की घटना के बाद बैतूल जिले में भी सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों ने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों सहित शहर की प्रमुख सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को बड़े हादसों का कारण बताते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के मौसम में खरीफ फसलों की बुवाई के बाद खेतों में मवेशियों का प्रवेश रोक दिया जाता है। वहीं, दूध देना बंद कर चुके पशुओं को कई पशुपालक खुले में छोड़ देते हैं। इसके चलते दिनभर इधर-उधर घूमने वाले मवेशी शाम और रात के समय सड़कों पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं। नागपुर-भोपाल फोरलेन, बैतूल-इंदौर मार्ग तथा अन्य प्रमुख मार्गों पर यह स्थिति सामान्य हो गई है।
रविवार को कृषि उपज मंडी मार्ग पर भी बड़ी संख्या में मवेशियों के सड़क पर बैठे रहने से यातायात प्रभावित हुआ। दोपहिया वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्हें हटाने के लिए कोई जिम्मेदार अमला मौके पर नहीं पहुंचा।
नागरिकों का कहना है कि राजगढ़ में ट्रक की चपेट में आने से गौवंश की मौत हुई, लेकिन यदि ऐसी स्थिति में कोई यात्री बस या अन्य वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो बड़ी जनहानि हो सकती है। इसलिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका ने पूर्व में आवारा पशु छोड़ने वालों पर दो हजार रुपये तक जुर्माना लगाने की घोषणा की थी, लेकिन अभियान बाद में ठंडा पड़ गया और समस्या जस की तस बनी हुई है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका, जनप्रतिनिधियों और गौसेवा संगठनों से संयुक्त अभियान चलाकर आवारा मवेशियों को सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने तथा सड़कों को पशुमुक्त बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी व्यवस्था नहीं बनाई गई तो राजगढ़ जैसी घटना बैतूल में भी हो सकती है।
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