नयी दिल्ली , मार्च 27 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में लड़ाई के कारण उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में बड़ी कटौती के बावजूद वर्ष 2026-27 के बजट में राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने के लक्ष्य के लिए हर प्रयास करेगी।

श्रीमती सीतारमण ने आगामी वित्त वर्ष के बजट से संबंधित विनियोग विधेयक (संख्या 2) 2026 और वित्त विधेयक-2026 पर राज्य सभा में आज ही हुई संयुक्त चर्चा का जवाब देते हुए पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क में कटौती से राजकोष मजबूती के लक्ष्यों पर असर को लेकर सदन में व्यक्त चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आया और व्यय का प्रबंध कड़ा करेगी -"इस कठिन समय को संभालेगी।" वित्त मंत्री ने कहा, ' हम हर परिस्थित को संभालने के लिए बराबर सतर्क रहेंगे।'उल्लेखनीय है कि सरकार ने अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के असर से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर 10-10 रुपये की कमी कर दी। इस बार के बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) के 4.3 प्रतिशत के बराबर रखने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विनिमयोग विधेयक संख्या 2 और वित्त विधेयक 2026 को लोक सभा को उसी रूप में लौटाने के प्रस्ताव को पारित कर दिया जिस रूप में इन्हें वहां परित किया गया था।

इसके साथ ही बजट 2026-27 के संसद में पारित कराने की प्रक्रिया पूरी हो गयी है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। महज़ एक महीने के भीतर कीमतों में यह भारी उछाल आया है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है। गत13 मार्च के बाद से 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें कभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे नहीं गिरी हैं।

उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह रहा कि इस समय दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में कीमतों में 30 से 50 फीसदी , उत्तरी अमेरिका में 30 फीसदी , यूरोप में 20 फीसदी और अफ्रीकी देशों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों से, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से, तेल और उर्वरकों की आपूर्ति मामले में भारी दबाव बना हुआ है; इसलिए हम इस स्थिति को बेहद सावधानी और सूझबूझ के साथ संभाल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने " हमें स्पष्ट निर्देश दिया है कि -भारत के नागरिकों पर किसी भी प्रकार का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए। हम उन्हीं निर्देशों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।"श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत में पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई हैं। उनमें कोई वृद्धि नहीं हुई है। सरकार ने इस आर्थिक बोझ को स्वयं वहन किया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तेल विपणन कंपनियाँ पर्याप्त मात्रा में तेल की खरीद करें और उसकी आपूर्ति को बिना किसी रुकावट के जारी रखें।

उन्होंने देश में ईंधन की कमी का हौवा खड़ा कर रहे लोगों की आलोचना करते हुए उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति को देखने को कहा। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत पड़ोस की स्थिति से खुश नहीं है। लेकिन पाकिस्तान में 'हाई-ऑक्टेन' ईंधन की कीमतों में 200% और पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में 20% की भारी वृद्धि रातों-रात कर दी गई है। अब पाकिस्तान में पेट्रोल 321 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।

पाकिस्तान में ईंधन की बचत करने के उद्देश्य से सिंध प्रांत में 'स्मार्ट लॉकडाउन' की घोषणा की गई है। इसके तहत लोगों की आवाजाही, सार्वजनिक सभाओं और कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहां स्कूलों को भी दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। सरकारी दफ़्तरों में अब चार दिन का हफ़्ता कर दिया गया है। निजी दफ़्तरों से कहा गया है कि वे अपने 50 प्रतिशत स्टाफ़ को 'वर्क फ्रॉम होम' पर भेज दें। मीडिया की रपटों के अनुसार पाकिस्तान में बाज़ारों और शॉपिंग सेंटरों को रात 21:30 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि , " हम (भारत में ) इनमें से कुछ भी नहीं कर रहे हैं। फिर भी कुछ नेता अफ़वाहें फैला रहे हैं कि लॉकडाउन लगेगा। इस तरह की अफ़वाहबाज़ी नहीं होनी चाहिए। यह सब डर फैलाने के लिए किया जा रहा है।"उन्होंंने बंगलादेश्मे बिजली न होने की वजह से सभी विश्वविद्यालयों को बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई के तरीके अपनाये जाने, पाँच-पाँच घंटे पर बारी बारी बिजली की कटौती , ढाका शहर में घरेलू बिजली इस्तेमाल पर नियमन , ऑक्टेन और डीज़ल की कमी के कारण ढाका भर में फ़्यूल स्टेशनों के बंद होने का भी जिक्र किया।

वित्त मंत्री ने कहा, 'दुनिया भर में हालात अच्छे नहीं हैं। हम हालात को इस तरह से संभाल रहे हैं कि हमारे नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।मैं कीमतों में एक बड़ा फ़र्क बताना चाहता हूँ। भारत में, कुछ भी नहीं बदला है।"वित्तमंत्री ने कहा कि वित्त विधेयक मोदी सरकार के सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए लाया गया है क्यों कि सरकार भारत की अर्थव्यवस्था को और गति देना चाहती है। बजट का लक्ष्य है कि विकास समावेशी हो और इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने विदेश से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए बजट में सीमाशुल्क व्यवस्था को आसान बनाये जाने और विदेशी सम्पत्तियों का खुलासा करने का अवसर देने का उल्लेख किया।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि 2025 में सरकार ने 1961 के आयकर कानून की जगह नया आयकर अधिनियम पारित करवाया और गत सितंबर में मला एवं सेवाकर (जीएसटी) में बुनियादी सुधार कराया गया। इससे बाजार को नयी गति मिली है। लघु और मझोले उद्यमों को कारोबार में आसानी हुई है।

परियोनजाओं पर अमल न होने की कुछ सदस्यों की शिकायत के जवाब में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि आज केंद्र प्रायोजित कोई भी योजना पैसा जारी किये जाने के इंतजार में नहीं अटकती, कोष अंतरण की पारदर्शी व्यवस्था है। पर उन्होंने कहा कि सरकार पैसे को कहीं पार्क करने के लिए नहीं देती क्यों की पैसे के लिए सरकार को भी उधार लेना पड़ता है।

वित्त मंत्री ने रेलवे और अन्य सरकारी उपक्रमों में नौकरियों के अवसरों में कमी के जवाब में -'रेलवे में नौकरी के लिए जमीन ' घोटाले का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के सदस्यों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि रेलवे और सेना में नियुक्तियां के लिए बराबर प्रक्रियायें जारी हैं। रेलवे ने भर्तियों के लिए वार्षिक कैलेंडर जारी करने की शुरूआत की है। सरकार की ओर से अब तक 18 रोजगार मेले लगाये गये हैं जिनमें 11 लाख नियुक्ति पत्र जारी किये गया हैं।

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