चंडीगढ़ , जुलाई 03 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हिसार स्थित राखीगढ़ी को भारत की प्राचीन सभ्यता का वैश्विक केंद्र बनाया जाएगा। यहां विकसित हो रहे विश्व स्तरीय स्थल संग्रहालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटक अत्याधुनिक तकनीक की सहायता से लगभग 8,000 वर्ष पुरानी सरस्वती-सिंधु सभ्यता का अनुभव कर सकेंगे।

चंडीगढ़ में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि परियोजना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, ज्ञान परंपरा और विरासत का वैश्विक प्रतीक बने।

करीब एक लाख वर्ग फुट क्षेत्र में बन रहे संग्रहालय में आधुनिक डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो-विजुअल तकनीकों का उपयोग होगा। भूतल और प्रथम मंजिल पर पांच-पांच विषय आधारित दीर्घाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें पुरातात्विक उत्खनन, नगर नियोजन, आवासीय वास्तुकला, जल प्रबंधन, व्यापार, सामाजिक जीवन और तकनीकी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। 3डी प्रेजेंटेशन, डिजिटल प्रोजेक्शन और लघु फिल्मों के माध्यम से आगंतुकों को सभ्यता की जानकारी दी जाएगी।

बच्चों और युवाओं के लिए अनुभवात्मक शिक्षण गतिविधियां भी होंगी, जहां वे प्राचीन मुहर निर्माण, ईंटों और कलाकृतियों की प्रतिकृतियों का अध्ययन कर सकेंगे। फिलहाल राखीगढ़ी के तीन टीलों पर खुदाई जारी है, जिसकी प्रमुख खोजों को भी संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा।

परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 90 करोड़ रुपये स्वीकृत किये हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-152 के निकट स्थित राखीगढ़ी को पर्यटन, संस्कृति और शोध का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे।

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