मुंबई , अगस्त 29 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अंदरूनी मतभेदों और नेताओं की बदलती राजनीतिक निष्ठाओं को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच शनिवार को मुंबई में हुई राकांपा (एसपी) की उच्च स्तरीय कोर कमेटी की बैठक में विधायक रोहित पवार की गैर-मौजूदगी साफ तौर पर चर्चा का विषय बनी रही।

पार्टी के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने विरोधी राकांपा गुट के साथ संभावित विलय या राजग में शामिल होने की लगातार चल रही अफ़वाहों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। वहीं, रोहित पवार का कार्यक्रम में शामिल न होना-जिसकी वजह पार्टी की नीतिगत दिशा को लेकर उनकी कथित बेचैनी और कांग्रेस के साथ उनकी बढ़ती नज़दीकी को माना जा रहा है-ज़बरदस्त राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री शिंदे ने कहा कि संगठन को मजबूत करना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है।

इस अहम बैठक में जितेंद्र आव्हाड, हर्षवर्धन पाटिल, अनिल देशमुख और सांसद नीलेश लंके जैसे प्रमुख नेता शामिल हुए। साथ ही, इस बैठक का इस्तेमाल सत्ताधारी महायुति सरकार पर कई मोर्चों पर तीखे हमला करने के लिए भी किया गया।

श्री शिंदे ने सवाल किया कि 58,000 से ज़्यादा कुनबी रिकॉर्ड मिलने के बावजूद मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे-पाटिल को भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा; उन्होंने इसके लिए सरकार के अधूरे वादों और रद्द किए गए प्रमाणपत्र को ज़िम्मेदार ठहराया।

आदिवासी छात्रों की ओर से कम स्टाइपेंड को लेकर 16 दिनों तक चली भूख हड़ताल की आलोचना करते हुए, पार्टी ने मंत्रियों की बेरुखी पर गहरी निराशा व्यक्त की। पार्टी ने नासिक कुंभ मेले की तैयारियों से जुड़े कथित बड़े फर्जी भर्ती घोटाले का पर्दाफाश किया और सत्ताधारी मंत्रियों के रिश्तेदारों पर उंगली उठाई।

पनवेल में भाजपा के एक पदाधिकारी के ज़ेरॉक्स सेंटर से संवेदनशील सरकारी दस्तावेज़ों की हज़ारों प्रतियां ज़ब्त किए जाने का उल्लेख करते हुए श्री शिंदे ने चुनावों से पहले मतदाता सूची में हेरफेर करने की गहरी साज़िश की चेतावनी दी और चुनाव आयोग से तुरंत दखल देने की मांग की।

श्री शिंदे ने राज्य प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने परिवहन विभाग के मराठी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू करने के आदेश को एक साल के लिए टाल दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साबित कर दिया है कि वह नयी दिल्ली के दबाव में असली सुपर बॉस हैं, जिससे सत्ताधारी गठबंधन के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

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