मुंबई , मार्च 31 -- शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का मजाक उड़ाते हुए दावा किया कि उनके कोई सच्चे दोस्त नहीं हैं और वे ऐसे लोगों से घिरे रहते हैं जिनकी चापलूसी वाली मानसिकता है।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन में श्री राउत ने ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष का उल्लेख किया और एक लोकतांत्रिक समाज में सार्वजनिक प्रतिरोध के सबूत के रूप में अमेरिका में व्यापक विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा किया।
श्री राउत ने कहा कि अमेरिका में लोगों के बड़े वर्ग सड़कों पर उतर आए हैं और कहा कि इस तरह की लामबंदी इस बात को दर्शाती है कि जब सत्ता अत्यधिक अत्याचारी हो जाती है तो नागरिकों का सतर्क रहना कितना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सुझाव दिया कि लोकतांत्रिक प्रणालियों में सक्रिय जनभागीदारी आवश्यक है और कहा कि नेतृत्व में निरंकुश प्रवृत्तियों के दिखने पर लोगों को चुप नहीं रहना चाहिए। उनकी ये टिप्पणियां ईरान संघर्ष और संबंधित नीतिगत मुद्दों को लेकर अमेरिका में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर आईं।
घरेलू राजनीति की बात करते हुए श्री राउत ने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसने भारत को धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर धकेल दिया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा माहौल नागरिकों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से रोकता है जिससे मनमानी शासन व्यवस्था और भीड़तंत्र पैदा होता है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और आपातकाल के विरोध जैसे आंदोलनों का उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में लोग अन्याय के प्रति अधिक निष्क्रिय और कम संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने नागरिकों से जागृत होने और लोकतांत्रिक मूल्यों की सक्रिय रूप से रक्षा करने का आग्रह किया।
श्री राउत की ये टिप्पणियां केंद्र की विदेश नीति की उनकी निरंतर आलोचना का भी हिस्सा हैं। हाल के हफ्तों में, उन्होंने अमेरिका, ईरान और इज़रायल के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया और पूछा कि राष्ट्रीय गौरव एवं संप्रभुता के लिए देश को श्री ट्रंप के प्रति विनम्र क्यों होना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वैश्विक मुद्दों पर ज्यादा मुखर रुख अपनाने और बदलती भू-राजनीतिक स्थिति में भारत की भूमिका स्पष्ट करने का भी आह्वान किया।
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