रांची , जून 12 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची के नगरी में प्रस्तावित रिम्स-2 को लेकर चल रहे विरोध को जायज बताया है।

श्री मरांडी ने कहा कि जमीन घोटाले के लिए कुख्यात हेमंत सोरेन यदि यह सोचते हैं कि वे नगड़ी में आदिवासी भाइयों-बहनों की जमीन जबरन हड़प लेंगे, तो उन्हें यह भ्रम तुरंत त्याग देना चाहिए। अनुमानित 10 हजार करोड़ रुपये की परियोजना के नाम पर यदि मुख्यमंत्री कमीशनखोरी और स्वार्थ की राजनीति करेंगे, तो उसका विरोध होना स्वाभाविक है।

श्री मरांडी ने कहा कि नगड़ी की उपजाऊ कृषि भूमि पर प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर स्थानीय आदिवासी परिवारों में गहरी चिंता और असंतोष है। वर्षों से जिन खेतों पर निर्भर होकर सैकड़ों परिवार अपनी आजीविका चला रहे हैं, उन्हें उनकी सहमति के बिना उजाड़ने का कोई भी प्रयास न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। विकास आवश्यक है, लेकिन विकास के नाम पर लोगों के अधिकार, संस्कृति और आजीविका की अनदेखी स्वीकार्य नहीं हो सकती।

श्री मरांडी ने कहा कि जब राज्य में रिम्स की मौजूदा व्यवस्था स्वयं कई चुनौतियों से जूझ रही है, तब सबसे पहले वहां की स्वास्थ्य सेवाओं, संसाधनों और प्रबंधन को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। रांची में कई ऐसे वैकल्पिक स्थान उपलब्ध हैं, जहां रिम्स-2 का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। हम आदिवासी भाइयों-बहनों को आश्वस्त करते हैं कि नगड़ी की एक इंच जमीन भी जबरन नहीं छीनी जाने दी जाएगी। भाजपा आदिवासियों, किसानों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

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