रांची , अक्टूबर 12 -- झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र में नाबालिग से मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर नाराजगी जताई।

सोमवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रांची में कुल 164 सीसीटीवी डिवाइस इंस्टॉल किए गए हैं। शहरी क्षेत्र के 25 थानों में से 17 में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 29 थानों में से केवल पांच थानों में ही कैमरे लगाए गए हैं।

राजधानी के कई पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए। पंडरा ओपी, हिंदपीढ़ी थाना, विधानसभा थाना और एयरपोर्ट थाना समेत अन्य थानों में कैमरे नहीं होने की जानकारी सामने आई। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि जब पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं होंगे, तो कानून-व्यवस्था कैसे बनाए रखी जा सकती है?कोर्ट ने पुलिस व्यवस्था में निगरानी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि थानों में सीसीटीवी कैमरे होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखी जा सकती है। साथ ही, किसी घटना की जांच में भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राजधानी में चेन छिनतई की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि सीसीटीवी कैमरे सही तरीके से काम करेंगे, तो अपराधियों में डर रहेगा। इससे अपराधियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में भी मदद मिल सकती है।

कोर्ट ने सड़क दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार हादसों के बाद वाहनों को सीसीटीवी फुटेज के जरिए ट्रेस नहीं किया जा पाता है। ऐसे में शहर के चौक-चौराहों पर लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठते हैं।

हाईकोर्ट ने रांची के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जानकारी मांगी है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि ये कैमरे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। इसके साथ ही एसएसपी, गृह सचिव और डीजीपी को सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए समय-सीमा बताने का निर्देश दिया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अब अगली सुनवाई में पुलिस थानों और शहर के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी दिए जाने की उम्मीद है।

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