नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- रसोई गैस (एलीपीजी) की कीमतों पर चर्चा की मांग को लेकर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच बुधवार को हल्की नोकझोंक देखने को मिली।

सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले श्री खरगे ने कहा कि सरकार जब चाहती है तब विधेयक लाती है, जिस भी मुद्दे पर चाहती है चर्चा कराती है और बयान देती है लेकिन विपक्ष यदि किसी भी मुद्दे पर चर्चा की मांग करता है तो उसे ठुकरा दिया जाता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने स्वयं दो बार नियम 176 के तहत अल्पकालिक चर्चा के लिए नोटिस दिया था जिसे स्वीकार नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया एलपीजी और गैस के लिए परेशान है लेकिन सरकार के पास इस पर चर्चा के लिए समय नहीं है जबकि कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

इस पर श्री रिजिजू ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में संबंधित मंत्रियों ने बयान दिये हैं, प्रधानमंत्री ने भी दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान दिये हैं। यहां तक कि वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान भी अधिकतर विपक्षी सदस्यों ने एलपीजी के मुद्दे पर ही अपनी बात रखी थी जिसका वित्त मंत्री ने विस्तारपूर्वक जवाब दिया था।

उन्होंने कहा कि भारत ने परिस्थितियों को अच्छे से संभाला है और पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती करने का ऐतिहासिक कदम उठाया है।

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष को इस मुद्दे को लेकर राजनीति न करने की नसीहत देते हुए कहा कि इसी मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक ने में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के नेता प्रतिपक्ष (क्रमशः राहुल गांधी और श्री खरगे) नहीं शामिल हुए।

उनकी इस बात पर सदन में सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के बीच हल्की नोकझोंक देखी गयी। श्री खरगे ने जवाब देते हुए कहा, "आपके प्रधानमंत्री कहां थे?" उन्होंने कहा कि बैठक में प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि थे तो कांग्रेस के भी वरिष्ठ प्रतिनिधि थे।

इस पर श्री रिजिजु ने विपक्ष पर खुद अपनी जिम्मेदारियों से भागने, उल्टे-सीधे बया देने और प्रधानमंत्री को दिन-रात गाली देने के आरोप लगाये।

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