नागपुर , मार्च 17 -- केंद्र सरकार ने मंगलवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय को सूचित किया कि वह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत के असर को कम करने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सक्रिय रूप से कदम उठा रही है।
केंद्र के इस जवाब पर गौर करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने एलपीजी वितरकों की ओर से दायर याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने पाया कि सरकार जनहित की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।
यह मामला छह एलपीजी वितरकों की ओर से दायर उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें ईरान संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के मद्देनजर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की गयी थी। इससे पहले 12 मार्च को अदालत ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और एक निजी कंपनी को नोटिस जारी किया था।
अदालत ने यह निर्देश भी दिया था कि घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस का भंडारण और वितरण पूरी तरह से मौजूदा नीतिगत ढांचे के अनुसार ही होना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि नागपुर स्थित 'कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड', घरेलू वितरण को प्राथमिकता देने के केंद्र के निर्देशों के बावजूद रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने में विफल रही है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है कि वैश्विक संकट का भारत की रसोई गैस आपूर्ति पर कोई बुरा असर न पड़े। उन्होंने कहा कि विशिष्ट शिकायतों का समाधान राज्य के अधिकारी कर सकते हैं और उन्होंने अदालत से इस मामले को बंद करने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोड़े की पीठ ने इस दलील को स्वीकार करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
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