मथुरा , फरवरी 21 -- गोकुल स्थित यमुना तट पर बसे रमणरेती आश्रम में ब्रज की पारंपरिक और आध्यात्मिक होली का भव्य आयोजन किया गया।

पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज के सानिध्य में संतों और हजारों श्रद्धालुओं ने फूलों और प्राकृतिक टेसू के रंगों से ठाकुरजी संग होली खेली। आश्रम परिसर सुबह से ही "जय राधे-कृष्ण" के जयघोष से गुंजायमान रहा।

आश्रम प्रशासन की ओर से टेसू के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किया गया, जिससे करीब 10 हजार लीटर रंग बनाया गया। इसके अतिरिक्त 11 क्विंटल गेंदा और गुलाब के फूलों से फूलों की होली खेली गई। मिलावटी और रासायनिक रंगों पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। श्रद्धालुओं को केवल आश्रम में तैयार किए गए प्राकृतिक रंगों से ही होली खेलने की अनुमति दी गई, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

सुबह करीब 11 बजे भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का मंचन हुआ, और मयूर नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया जिसमें लठमार होली की मनोहारी झलक प्रस्तुत की गई। गुरु शरणानंद महाराज ने राधा-कृष्ण स्वरूपों को अबीर-गुलाल अर्पित कर उत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद संतों और सेवादारों ने फूलों की वर्षा के बीच होली खेली। मंच पर राधा-कृष्ण स्वरूपों की होली देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। महाराज भी स्वयं उत्सव में शामिल हुए और भक्तों के साथ रंगोत्सव का आनंद लिया।

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