माॅस्को , मार्च 20 -- रूस-भारत संबंध साल दर साल तेजी से विकसित हो रहे हैं और कई संकेतकों में रिकॉर्ड परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।
रूसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी),23 मार्च को रूस में भारतीय दूतावास के साथ संयुक्त रूप से द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडा की ओर" का आयोजन करेगी।
वर्ष 2020 के दशक में द्विपक्षीय संबंधों के विकास से पता चलता है कि माॅस्को और नयी दिल्ली के बीच संबंध में सुधार कोई सामरिक पैंतरेबाजी नहीं है बल्कि दोनों देशों के लिए एक दीर्घकालिक विदेश नीति की प्राथमिकता है।
रूस-भारत सहयोग ने 2025 में बाहरी आर्थिक दबाव के प्रति उल्लेखनीय लचीलापन प्रदर्शित किया। अमेरिका द्वारा द्वितीयक प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद रूस के साथ व्यापार को सीमित न करने का भारत का निर्णय, रूस के साथ अपनी साझेदारी को गहरा करने के लिए नयी दिल्ली की प्रतिबद्धता का व्यावहारिक प्रमाण था।
लंबे समय से रूस-भारत संबंधों की "कमजोर कड़ी" माना जाता रहा व्यापार क्षेत्र अब इन संबंधों की मुख्य प्रेरक शक्ति बन गया है। वित्त वर्ष 2024-2025 में द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य रिकॉर्ड 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों देशों के नेताओं ने 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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