नयी दिल्ली , सितंबर 18 -- केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने शुक्रवार को कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था भारत के अगले विकास के मोर्चे के रूप में उभर रही है और यह युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रही है।
श्री मुरुगन ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित जिंदल नीति सम्मेलन में "कानून, नीति और रचनात्मक अर्थव्यवस्था" विषय पर उद्घाटन समारोह में कहा कि फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल सामग्री जैसे क्षेत्र विचारों, कल्पना, संस्कृति, नवाचार और बौद्धिक संपदा से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने रचनात्मक अर्थव्यवस्था के वैश्विक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 3.1 प्रतिशत और वैश्विक रोजगार में 6.2 प्रतिशत का योगदान देती है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 5.7 करोड़ भारतीय पहले से ही सांस्कृतिक एवं रचनात्मक व्यवसायों में काम कर रहे हैं। भारत की मीडिया एवं मनोरंजन अर्थव्यवस्था 2.5 ट्रिलियन रुपये की है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक क्षेत्रों का विस्तार युवाओं के लिए नए करियर विकल्प और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध करा रहा है।
युवाओं के लिए उभरते अवसरों पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि अकेले एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र को 2030 तक लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को भविष्य के लिए जरूरी कौशल से लैस करने के उद्देश्य से भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान और एवीजीसी क्रिएटर लैब्स को समर्थन दे रही है। इसके तहत 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में इन पहलों के लिए समर्थन की घोषणा की गयी है।
डॉ. मुरुगन ने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विकास के लिए उचित कानूनी एवं नीतिगत ढांचा आवश्यक है। इसमें कॉपीराइट सुरक्षा, रचनाकारों को उचित मुआवजा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार उपयोग शामिल है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे मान्यताओं और संस्थानों पर सम्मान, तर्क एवं साक्ष्य के साथ सवाल उठायें। उन्होंने कहा कि युवा अपने विचारों और कौशल के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
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