चेन्नई , मार्च 26 -- सेना के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर (ईएमई) ने गुरुवार को आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के साथ स्वदेशी इंजीनियरिंग क्षमताओं को बढ़ावा देने एवं महत्वपूर्ण सैन्य प्रौद्योगिकियों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भरता में कमी लाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

यह साझेदारी सेना की बदलती परिचालन एवं रखरखाव आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी समाधानों की संयुक्त रूप से पहचान करने, विकसित करने एवं तैनात करने वाले एक संरचनात्मक दृष्टिकोण को सक्षम बनाएगी।

इस एमओयू का उद्देश्य अकादमिक विशेषज्ञता, उद्योग क्षमताओं और सैन्य अंतर्दृष्टि को एकीकृत करके जमीनी आवश्यकताओं और अत्याधुनिक अनुसंधान के बीच की खाई को पाटना है।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण एवं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने वाले इस ऐतिहासिक सहयोग के लिए एमओयू पर आज चेन्नई में ईएमई कोर और प्रवर्तक के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षर किया गया।

ईएमई कोर सेना की तकनीकी रीढ़ है जो सेना के हथियार प्लेटफार्मों के रखरखाव एवं संचालन के लिए जिम्मेदार है। इसी पहल के अंतर्गत, चेन्नई के पास अवादी में एक नोडल स्वदेशीकरण केंद्र स्थापित किया गया है जिससे क्षेत्र के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ प्राप्त किया जा सके और तमिलनाडु रक्षा गलियारे को रक्षा विनिर्माण एवं नवाचार के केंद्र के रूप में मजबूत किया जा सके।

इस सहयोग को मुख्यालय बेस कार्यशाला ग्रुप और सेना के स्वदेशीकरण निदेशालय के माध्यम से सुगम बनाया गया है जिसे उन्नत प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावहारिक अनुसंधान में उच्च स्तरीय सहयोग के लिए एक मजबूत संरचना स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के सीईओ डॉ. एम.जे. शंकर रमन ने कहा, "रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बनने के लिए सशस्त्र बलों, शिक्षा जगत एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के बीच मजबूत तालमेल बहुत आवश्यक है। यह साझेदारी तकनीकी रूप से मजबूत एवं परिचालन के दृष्टिकोण से प्रासंगिक स्वदेशी समाधानों को गति प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"बेस वर्कशॉप ग्रुप के कमांडर मेजर जनरल ललित कपूर ने कहा, "यह सहयोग अत्याधुनिक अनुसंधान का लाभ उठाकर सेना के स्वदेशीकरण प्रयासों को मजबूत करता है। आईआईटीएम प्रवर्तक के साथ मिलकर काम करते हुए, ईएमई कोर का लक्ष्य परिचालन तत्परता को बढ़ावा देना, पुरानी हथियार प्रणालियों को उन्नत तकनीकों से सुसज्जित करना और भविष्य की भूमिकाओं के लिए विशिष्ट क्षमताओं का विकास करना है, साथ ही बाहरी स्रोतों पर निर्भरता को बहुत हद तक कम करना है।"इस सहयोग के अंतर्गत, प्रमुख केंद्रीय क्षेत्रों में सेना के उपकरणों एवं उप-प्रणालियों से संबंधित समस्याओं की पहचान करना, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और प्रोटोटाइपों के विकास में सहयोग करना, तकनीकी सत्यापन एवं क्षेत्र मूल्यांकन करना और तैनाती के लिए उत्पाद निर्माण में सहायता करना शामिल है।

प्रवर्तक, नोडल स्वदेशीकरण केंद्र के साथ मिलकर सेंसिंग सिस्टम, साइबर-फिजिकल प्रणाली और स्वायत्त प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगा, साथ ही स्टार्टअप एवं शैक्षणिक सहयोगियों की भागीदारी को सक्षम बनाएगा जबकि ईएमई कोर वास्तविक दुनिया में व्यावहारिकता सुनिश्चित करने के लिए परिचालन आवश्यकता एवं सत्यापन सहायता प्रदान करेगा।

लेफ्टिनेंट जनरल करणबीर सिंह बराड़ (सेवानिवृत्त) और आईआईटीएम प्रवर्तक के विशिष्ट रणनीतिक सलाहकार ने कहा, "आधुनिक सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशीकरण एक परिचालनात्मक आवश्यकता है। यह सहयोग सेना की विशेषज्ञता एवं अकादमिक जगत के नवाचारों को एक साथ लाता है। अवाडी में नोडल स्वदेशीकरण केंद्र के साथ, सेना रक्षा स्टार्टअप और उद्योग को भारत के विशिष्ट परिचालन वातावरण के लिए नवाचारों को परिष्कृत एवं अनुकूलित करने के लिए आसान पहुंच प्रदान करेगी।"दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त संचालन समिति परियोजना चयन एवं रणनीतिक समन्वय की देखरेख करेगी। इस साझेदारी से भारत के घरेलू रक्षा तंत्र को बहुत मजबूती प्राप्त होने की उम्मीद है क्योंकि इससे अनुसंधान को तेजी से व्यावहारिक एवं क्षेत्र में उपयोग के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित किया जाएगा, साथ ही देश के रक्षा नवाचार परिदृश्य में चेन्नई की प्रमुख भूमिका भी मजबूत होगी।

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