कोण्डागांव , अगस्त 27 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोण्डागांव में रक्षाबंधन से पहले करीब 700 वर्ष पुरानी अनूठी 'देव राखी' परंपरा निभाई गई। इसके तहत नगर के विभिन्न देवी-देवताओं को पारंपरिक रक्षा सूत्र अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, रक्षा और मंगल की कामना की गई।

रक्षाबंधन पर्व से एक दिन पूर्व 26 अगस्त को आयोजित देव राखी कार्यक्रम में ग्राम पटेल, पुजारी, सिरहा, गायता, माझी और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। स्थानीय मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन पर एक-दूसरे को राखी बांधने से पहले आराध्य देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है। प्रकृति और देवी-देवताओं के प्रति आस्था से जुड़ी यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

देव भगत एवं नगरपालिका अध्यक्ष नरपति पटेल ने बताया कि देव राखी की परंपरा कोण्डागांव नगर की बसाहट के समय से चली आ रही है। परंपरा के तहत सबसे पहले माता गुड़ी, माउली गुड़ी, लालमन कुंवर और भंगाराम सहित बाजार क्षेत्र में स्थापित देवी-देवताओं को राखी बांधी जाती है। इसके बाद राम मंदिर, उमराव मंदिर, चौरासी गुड़ी, दंवरी वाले समिया मंदिर और माउली मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है। अंत में माता पुजारी सिरहा के स्थान पर देव राखी बांधकर परंपरा पूरी की जाती है।

देव राखी के लिए इस्तेमाल होने वाला रक्षा सूत्र सामान्य राखियों से अलग होता है। इसे गांडा समाज के लोग रुई और धागे से पारंपरिक तरीके से विशेष रूप से तैयार करते हैं। मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं को इसी पारंपरिक रक्षा सूत्र को अर्पित किया जाता है।

नरपति पटेल के मुताबिक कोण्डागांव क्षेत्र की 22 पाली के देवी-देवताओं के लिए भी देव राखी भेजी जाती है। आयोजन की तिथि श्रावण मास की तिथि और परंपरा से जुड़े लोगों एवं ग्रामीणों की सहमति के आधार पर तय की जाती है। यह परंपरा स्थानीय संस्कृति, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।

कार्यक्रम में माता पुजारी सिरहा श्यामचरण निषाद, ग्राम पटेल कन्हैया लाल कौशिक, देव भगत एवं नगरपालिका अध्यक्ष नरपति पटेल, माटी पुजारी बुधमन कोर्राम, गायता आसमन कोर्राम और ग्राम देहारी साधूराम कोर्राम सहित ग्रामीण मौजूद रहे।

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