रायपुर , अगस्त 23 -- छत्तीसगढ़ में रक्षाबंधन के अवसर पर महतारी वंदन और बिहान योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही हैं। महतारी वंदन से मिलने वाली राशि का उपयोग महिलाएं घरेलू जरूरतों और बच्चों के पोषण से लेकर बेटियों के भविष्य के लिए बचत तथा त्योहार की तैयारियों में कर रही हैं, वहीं बिहान से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार और सीजनल गतिविधियों के जरिए अपनी आय बढ़ा रही हैं।

सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम जमगवां की उर्मिला यादव महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों और बच्चों के खान-पान के लिए कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने बेटी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाया है, जिसमें वह हर महीने 200 रुपये जमा कर रही हैं।

उर्मिला के मुताबिक नियमित आर्थिक सहायता मिलने से घरेलू खर्चों का प्रबंधन आसान हुआ है और बेटी के भविष्य के लिए नियमित बचत करने में भी मदद मिल रही है। उनका कहना है कि योजना की राशि से परिवार की जरूरत के समय अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिलता है।

इसी तरह रायगढ़ शहर के इंदिरा नगर वार्ड क्रमांक सात की तारागिरी गोस्वामी ने महतारी वंदन योजना के तहत इस माह मिली राशि से अपने भाई के लिए राखी खरीदी और रक्षाबंधन की तैयारियां कीं। तारागिरी का कहना है कि नियमित रूप से मिलने वाली राशि के कारण उन्हें त्योहार की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इससे अपनी आवश्यकताओं से जुड़े आर्थिक निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

दूसरी ओर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का जरिया बन रहा है। जशपुर जिले की सरिता यादव ने स्व-सहायता समूह से मिले ऋण की मदद से आटा चक्की और खाद्य सामग्री का व्यवसाय शुरू किया है। इससे उन्हें वर्तमान में हर महीने करीब 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

सरिता ने बताया कि बिहान से जुड़ने से पहले छोटे-मोटे खर्चों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। समूह से ऋण मिलने के बाद उन्होंने व्यवसाय शुरू किया और अब अपने दैनिक तथा व्यक्तिगत खर्च स्वयं वहन करने के साथ भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं।

रक्षाबंधन के मौके पर बिहान से जुड़ी महिलाएं अपने हुनर को भी आमदनी का जरिया बना रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत किशुन नगर में जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 12 महिलाएं स्थानीय और घरेलू संसाधनों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं।

समूह की महिलाएं चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीज सहित अन्य सामग्री को रंगकर और सजाकर राखियां बना रही हैं। रेशमी धागे, ऊन और दूसरी सजावटी सामग्री बाजार से खरीदी जाती है। कम लागत में तैयार इन राखियों की बिक्री स्टॉल और घर से की जा रही है।

समूह की सदस्य सोनाली सिंह के अनुसार सभी 12 महिलाएं मौसम और त्योहार के अनुरूप अलग-अलग आजीविका गतिविधियां करती हैं। वर्तमान में रक्षाबंधन को देखते हुए राखी निर्माण किया जा रहा है। समूह की दीप्ति चौधरी ने बताया कि घरेलू सामग्री और पुराने बीजों का रचनात्मक उपयोग कर अलग-अलग डिजाइन की राखियां तैयार की जा रही हैं।

समूह की आशा रवि के अनुसार महिलाएं करीब तीन वर्षों से कम लागत में राखियां तैयार कर रही हैं। बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आजीविका की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

महतारी वंदन और बिहान से लाभान्वित महिलाओं ने आर्थिक सहायता और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

इन महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता, स्व-सहायता समूह और स्वरोजगार के अवसर ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं को परिवार की आर्थिक व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ स्वयं की आय और भविष्य के लिए बचत का आधार उपलब्ध करा रहे हैं।

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