वाराणसी , अगस्त 26 -- रक्षाबंधन पर इस बार भाइयों की कलाई पर क्रोशिया से बनी हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल राखियां सजेंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी पिंडरा के गरथमा और हरहुआ के मंसापुर गांव की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने तिरंगा, कृष्ण, रुद्राक्ष, मोती और क्रोशिया डिजाइन वाली आकर्षक राखियां तैयार की हैं। वाराणसी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, विकास भवन, काशी प्रेरणा और आकांक्षा मार्ट समेत विभिन्न स्थानों पर गुरुवार को इनकी बिक्री होगी।
समूह की महिलाओं अनुराधा भारद्वाज, रंजना सिंह, ऊषा सिंह, मंजू देवी, रागनी और काजल ने पारंपरिक क्रोशिया कला को रोजगार का माध्यम बनाया है। महिलाओं के मुताबिक राखी बनाने से लेकर आकर्षक पैकिंग तक का काम वे स्वयं करती हैं, जिससे इनकी कीमत बाजार में उपलब्ध अन्य राखियों की तुलना में किफायती रहती है। हस्तनिर्मित राखियों की बढ़ती मांग से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
महादेव स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष अनुराधा भारद्वाज ने बताया कि रक्षाबंधन के दौरान समूह को करीब 30 से 35 हजार रुपये की आय होती है। उपायुक्त स्वत: रोजगार पवन कुमार सिंह ने कहा कि आजीविका मिशन की ओर से महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए मेलों, प्रदर्शनियों, आकांक्षा मार्ट और काशी प्रेरणा मार्ट में स्टॉल उपलब्ध कराने में सहयोग किया जा रहा है। इससे महिलाओं को बाजार उपलब्ध होने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।
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