भोपाल , अगस्त 27 -- रक्षाबंधन की पूर्णिमा पर 28 अगस्त की सुबह गहरा आंशिक चंद्रग्रहण लगेगा। इसमें चंद्रमा का करीब 96.3 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में रहेगा और वह तांबे जैसा लाल दिखाई देगा। हालांकि भारतीय समयानुसार ग्रहण के दौरान चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा, इसलिए यह घटना भारत में दिखाई नहीं देगी।
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस स्थिति में आती है कि उसकी गहरी छाया चंद्रमा के केवल एक हिस्से को ढकती है, तो इसे आंशिक चंद्रग्रहण कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि यह ग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका तथा अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। गणितीय अनुमान के अनुसार विश्व की करीब 41 प्रतिशत आबादी इस खगोलीय घटना को देख सकेगी।
सारिका घारू ने कहा कि 12 अगस्त को हुए सूर्यग्रहण के करीब 15 दिन बाद चंद्रग्रहण होने के कारण सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक तथ्य यह है कि ग्रहण जोड़ी के रूप में आते हैं और सामान्यतः 15 दिन के अंतराल में दूसरा ग्रहण होता है। इसलिए 15 दिन के अंतराल पर ग्रहण होना कोई अनोखी या अनिष्टकारी घटना नहीं है।
ग्रहण का आंशिक चरण भारतीय समयानुसार सुबह 8 बजकर 3 मिनट 54 सेकंड पर शुरू होगा और दोपहर 11 बजकर 21 मिनट 59 सेकंड पर समाप्त होगा। इसकी अवधि करीब तीन घंटे 18 मिनट रहेगी।
आगामी ग्रहणों में छह फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्यग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। 20-21 फरवरी 2027 को उपछाया चंद्रग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई देगा, लेकिन इसकी उपछाया ग्रहण के रूप में मान्यता नहीं है। दो अगस्त 2027 को पूर्ण सूर्यग्रहण भारत में आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई देगा, जबकि 16-17 अगस्त 2027 का उपछाया चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
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