चंडीगढ़ , अप्रैल 26 -- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राज्य में नशे की ओवरडोज़ से हुई हालिया मौतों पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है।
श्री रंधावा ने लगातार हो रही युवाओं की मौत पर भावुक होते हुए सरकार से पूछा कि आखिर पंजाब और कितने बेटे खोएगा। पंजाब के युवाओं को कौन बचाएगा। पंजाब का यह दर्द है कि 48 घंटे में चार अंतिम संस्कार करने पड़ रहे हैं। नशे से अपनी जान गवांने वाले इन युवाओं की मौत पर सियासत नहीं बल्कि जवाबदेही चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ 48 घंटों के भीतर नशे के कारण चार युवाओं की दुखद मौत न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि यह वर्तमान सरकार की नशे के खिलाफ लड़ाई में नाकामी का गंभीर प्रमाण भी है। ये घटनाएं कोई इक्का-दुक्का मामले नहीं हैं। ये मान सरकार के "युद्ध नशियां विरुद्ध" अभियान की ज़मीनी हकीकत को उजागर करती हैं, जोकि बड़े-बड़े दावों से बिल्कुल विपरीत है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा आप सरकार तुरंत कार्रवाई नहीं करती है, तो इतिहास इस दौर को एक ऐसी अवधि के रूप में याद करेगा, जब एक पूरी पीढ़ी को बचाने का मौका गंवा दिया गया। पंजाब का युवा सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। वे हमारे भविष्य की नींव हैं। हर एक मौत पूरे सिस्टम की सामूहिक विफलता है, और मौजूदा सरकार को इस बिगड़ते हालात की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
श्री रंधावा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पिछले छह महीनों में नशे से हुई कुल मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाया और पूछा कि ये आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि हर दिन हो रही कीमती ज़िंदगियों के नुकसान का मामला है। आप पार्टी की सरकार नशे के खिलाफ निर्णायक युद्ध का वादा करके सत्ता में आई थी। आज पंजाब के लोग पूछ रहे हैं कि वह युद्ध कहां है, अगर यह "युद्ध" है, तो हमारे युवा क्यों मर रहे हैं, नशे के नेटवर्क खुलेआम क्यों फल-फूल रहे हैं? जवाबदेही क्यों नहीं दिख रही।
उन्होंने मुख्यमंत्री से राजनीतिक दिखावे से ऊपर उठकर इस मुद्दे की गंभीरता को समझने की अपील की। उन्होंने पंजाब के लोगों को भरोसा दिलाया कि वह इस मुद्दे को कांग्रेस हर मंच पर उठाते रहेंगे और तब तक सरकार को जवाबदेह ठहराते रहेंगे, जब तक ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं होती।
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