चंडीगढ़ , जून 20 -- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को 'स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग' थीम पर भिवानी स्थित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय ने सेमिनार आयोजित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए, भारतीय चिकित्सा अकादमी फॉर प्रिवेंटिव हेल्थ के कार्यकारी सदस्य डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि दैनिक जीवन मे योग का नियमित अभ्यास वृद्धावस्था में मानव-शरीर को ओजस्वी और स्वस्थ बनाये रखेगा। योग व्यायामों का मानव शरीर की सभी प्रणालियों पर जिनमें ग्रन्थि, अंग और नाड़ी तंत्र सम्मिलित हैं, प्रत्यक्षत: स्वास्थ्य प्रदर्शित करने वाले प्रोत्साहनकारी और विनियमित करने वाला प्रभाव पड़ता है। इनका पूरे शरीर पर शुद्धकारी और पुन: यौवन प्रदान करने वाला प्रभाव होता है।

एसोसिएशन ऑफ स्टडीज फॉर हेल्थकेयर के प्रमुख अन्वेषक, डॉ. पुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज (दिल की बीमारी) को रोकने में योग अहम भूमिका निभाता है। योग का नियमित अभ्यास ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है, दिल की सेहत को बेहतर बनाता है और तनाव व चिंता को कम करता है, जो कोरोनरी आर्टरी डिजीज के बड़े जोखिम कारक हैं।

जाने माने चिकित्सा शोधार्थी ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि योग आसन ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं, दिल पर दबाव कम करते हैं और शरीर का वजन सही बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित योग अभ्यास मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है और वजन घटाने में मदद करता है। सांस लेने की एक्सरसाइज दिल की कार्यक्षमता को मजबूत करती हैं और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को बेहतर बनाने में योगदान देती हैं।

इस मौके पर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ गायत्री ने कहा कि योग तनाव को मैनेज करने में मदद करता है, जबकि प्राणायाम और ध्यान मन को शांत रखते हैं और तनाव हार्मोन को कम करते हैं। अन्य विशेषज्ञो ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में कई चिकित्सा छात्र एवं छात्राए शामिल हुए।

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