धारवाड़ , जुलाई 31 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 2016 में भाजपा जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति मोहम्मद नवाज और न्यायमूर्ति जी बसवराजा की पीठ ने कुलकर्णी के साथ-साथ चंद्रशेखर इंदी, दिनेश एम और निलंबित पुलिस अधिकारी चन्नाकेशव टींगरीकर समेत अन्य सह-आरोपियों की सजा पर भी रोक लगाते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय ने कुलकर्णी को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों पर राहत दी है। इसके अलावा उन्हें बिना अनुमति देश न छोड़ने और जरूरत पड़ने पर अदालत में पेश होने के निर्देश दिये गये हैं। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच में गवाहों के बयानों में आये विरोधाभास का हवाला दिया, जबकि सीबीआई ने इसका विरोध किया था।
इस फैसले पर निराशा जताते हुए कार्यकर्ता बसवराज कोरवड़ा और मृतक के भाई गुरुनाथ गौड़ा ने इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।
धारवाड़ में पत्रकारों से बातचीत में श्री कोरवड़ा ने कहा कि यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला है और वे विस्तृत निर्णय की समीक्षा के बाद उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि सबूत मिटाने से जुड़े पहलू और गवाहों को प्रभावित करने की आशंकाएं अब भी विचारणीय हैं।
यह मामला जून 2016 का है, जब धारवाड़ के सप्तपुर स्थित एक जिम में योगेश गौड़ा की हत्या कर दी गयी थी। पहले धारवाड़ पुलिस और बाद में सीबीआई जांच के बाद विशेष अदालत ने इसी वर्ष कुलकर्णी और अन्य अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी थी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित