गोरखपुर , मई 26 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर गोरखपुर जिले में स्थित राप्ती नदी की बाढ़ से महानगर को सुरक्षित करने और शहरवासियों को वैकल्पिक यातायात मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाबर्ट तटबंध को फोरलेन में विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है वहीं, सिंचाई विभाग ने पांच दशक पुराने नियंत्रकों की जगह 30.28 करोड़ रुपये की लागत से नए नियंत्रक बना दिए है।
आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि गोरखपुर में राप्ती नदी के बाएं तट पर ब्रिटिश काल में बने 3.9 किलोमीटर लंबे हाबर्ट तटबंध का चौड़ीकरण किया जा रहा है। पहले इस तटबंध के शीर्ष की चौड़ाई सात मीटर थी, जिसे लोक निर्माण विभाग द्वारा फोरलेन सड़क के रूप में विकसित करते हुए 25 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है। दूसरी ओर इस तटबंध पर सिंचाई विभाग ने पुराने नियंत्रकों की जगह नए नियंत्रकों का पुनर्निर्माण करा दिया है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आनंद गौतम के अनुसार बाक्स ड्रेन बना कर हाबर्ट बांध फोरलेन पर नए सिरे से नियंत्रक का निर्माण किया गया है। इस परियोजना से बारिश और बाढ़ के दौरान जलनिकासी की समस्या से शहर को बड़ी राहत मिलेगी और बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत होगी। नियंत्रक के गेट सिंचाई विभाग के कार्यशाला खंड की तरफ से लगाए गए हैं।
आठों नियंत्रकों के नालों पर आधुनिक 'ट्रेस रैक' भी लगाए जाएंगे। मजबूत लोहे की जालियों वाले ट्रेस रैक लग जाने से ठोस कचरा सीधे नदी में नहीं जा पाएगा। नालों के रास्ते बहकर आने वाले मृत पशु भी ट्रेस रैक पर ही रुक जाएंगे। इससे नदी को प्रदूषित होने से भी बचाया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि गोरखपुर के डोमिनगढ़, बहरामपुर, इलाहीबाग, मिर्जापुर, बसंतपुर नरकटिया, घसियारी, हांसूपुर राजघाट और ट्रांसपोर्टनगर स्थित सभी आठ नियंत्रकों का सिविल कार्य पूरा हो चुका है साथ ही नियंत्रक पर गेट लगाने का यांत्रिक कार्य भी करा लिया गया है।
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