, May 16 -- योगी ने एमपीएसपी की हर संस्था के लिए उत्कृष्ट परिसर संस्कृति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद सिर्फ स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या अस्पताल खोलने वाली संस्था नहीं है। बल्कि इसका ध्येय शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं के माध्यम से समाज तथा राष्ट्र के सामाजिक विकास में योगदान देना है। इस परिषद की नींव ही इसी भावना के साथ राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करने के लिएए राष्ट्र हित में सुयोग्य नागरिक तैयार करने के लिए रखी गई। परिस्थितियां अनुकूल रही होंए या प्रतिकूलए परिषद इस समग्र लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं का आहवन किया कि वह भारतीय ज्ञान परंपरा का सतत विस्तार करें। भारतीय ज्ञान परंपरा हमें विरासत पर गर्व की अनुभूति करने की प्रेरणा देती है। ऐसा करने पर हम वर्तमान और भावी पीढ़ी को भारत की ज्ञान प्रणाली और इसके विरासतों से जोड़ सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं में अनुशासित परिसर संस्कृति को सदैव प्राथमिकता पर रखा है। परिषद की संस्थाओं ने इस मामले में अनुकरणीय प्रयास किया है। परिसर में अनुशासन की भावना के साथ स्वच्छता, हरियाली और सबका सबके प्रति सद्भाव रहे इसका नियमित पर्यवेक्षण करना सभी संस्थाध्यक्षों की जिम्मेदारी है।
योगी ने कहा कि संस्था में समय का पालन और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए संस्थाध्यक्ष पहले इसे खुद पर लागू करें। ऐसा होने पर दूसरे लोगों पर यह स्वतः स्फूर्त लागू होने लगता है। उन्होंने सभी संस्थाध्यक्षों को विभिन्न प्रभार देने संबंधी कार्यों की नियमित समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा कि सभी संबंधित प्रभारी को प्रतिदिन संपूर्ण परिसर का एक चक्कर जरूर लगाना चाहिए ताकि वह अपने प्रभार से संबंधित व्यवस्था सुनिश्चित कर सके।
योगी ने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय से संबंधित जो भी प्रभार जैसे स्वच्छता, अनुशासन आदि मिलें उसे उत्साहपूर्वक स्वीकार कर मिसाल पेश करना चाहिए।
उन्होंने संस्थापकों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखने का मंत्र देते हुए कहा कि यह भाव आपकी संस्था और आपको आगे बढ़ाने में मददगार होगा। सीएम ने कहा कि विद्यालय में सकारात्मक माहौल, परिसर का गंदगीमुक्त, स्वच्छ और सुंदर होना आवश्यक है। किसी भी छात्र के अभिभावक विद्यालय में आएं तो परिसर की स्वच्छता, सुंदरता, अनुशासन और सकारात्मक माहौल देखकर प्रभावित होकर जाएं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बदलते समय के साथ सामंजस्य बनाने और अग्रणी बने रहने के नई तकनीकी और प्रौद्योगिकी को परखने और संस्था, विद्यार्थी हित के अनुरूप उसे अंगीकार करने पर बल दिया।
योगी ने सभी शिक्षण संस्थाओं में प्रार्थना सभाओं, राष्ट्र गान, राष्ट्र गीत को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे सकारात्मक, आध्यात्मिक और प्रभावपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में पुस्तकालय का समृद्ध होना व्यापक विद्यार्थी हित में होता है इसलिए पुस्तकालय में भरपूर, अच्छी, रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों.कर्मचारियों के क्षमता संवर्धन हेतु प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन के साथ यह निर्देश भी दिए कि छात्रों के करियर काउंसिलिंग पर भी विशेष और नियमित ध्यान दिया जाए।
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