अयोध्या , अक्टूबर 26 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में दीपोत्सव-2026 को भव्य, दिव्य और गरिमामय बनाने के लिए अयोध्या में तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजन को सुव्यवस्थित और सकुशल संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन संत-महात्माओं और जनप्रतिनिधियों के सुझावों के अनुरूप व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है।
इसी क्रम में जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने तुलसी उद्यान भवन में साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में संतों ने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है। आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इसकी भव्यता के साथ व्यवस्थाओं की सुचारुता और गरिमा बनाए रखना भी जरूरी है। संतों ने संत-महात्माओं के आवागमन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन के संबंध में सुझाव दिए।
संतों ने सुझाव दिया कि दीपोत्सव के दौरान ही नहीं, बल्कि आयोजन के बाद भी व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जाए। प्रमुख स्थलों पर अयोध्या के धार्मिक और दर्शनीय स्थलों को दर्शाने वाले मानचित्र लगाए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को अपने गंतव्य तक पहुंचने में आसानी हो। इसके अलावा दूसरे जिलों के प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर श्रद्धालुओं और वाहनों का आवागमन सुगम बनाने तथा आमजन की सुविधाओं का ध्यान रखने पर जोर दिया गया।
साधु-संतों ने अयोध्या को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया और दीपोत्सव के सफल आयोजन की कामना की। उन्होंने तैयारियों में जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा भी दिया।
बैठक में महापौर गिरीशपति त्रिपाठी और विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने भी सुझाव दिए। उन्होंने दीपोत्सव को भव्य और गरिमामय बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ सहयोग और सहभागिता सुनिश्चित करने की बात कही। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने संतों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों के लिए आभार जताते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने तथा सुझावों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में स्वामी अवधेश कुमार दास (बड़ा भक्तमाल), गुरवीर सिंह सोढ़ी (ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा), महंत डॉ. भरत दास (उदासीन संगत आश्रम, रानोपाली), नंदराम दास जी महाराज (हनुमानगढ़ पट्टी), महंत रामदास (हनुमानगढ़, नाका), स्वामी अनंत पद्मनाभाचार्य (सुग्रीव किला), स्वामी सियाराम (हनुमत भवन), महंत सुरेशदास, राम लखन दास (दशरथ महल), महंत राय राम शंकर दास (प्रतिनिधि, दशरथ महल), महंत गिरीश दास (डांडिया मंदिर), महंत आशुतोष दास (कामधेनु आश्रम), शिवम दास (बेतिया मंदिर), डॉ. महेश दास, महंत हेमंत दास, महंत रामचरण दास (महंत पट्टी बसंतिया), ज्ञानी चरणजीत सिंह (गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड), महंत संदीप दास (उज्जैनिया पट्टी, हनुमानगढ़ी), राघवेंद्र दास, राघवाचार्य जी महाराज (प्रतिनिधि, रामलला सदन देवस्थान) और महंत रामशरण दास (रंग महल) सहित अन्य संत-महात्मा उपस्थित रहे।
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