नैनीताल , अप्रैल 22 -- उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) मामले में बुधवार को सुनवाई नहीं हो पायी। अब इस मामले पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत ने सरकार से यूसीसी नियमावली में संशोधन पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले में बुधवार को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली सुरेश सिंह नेगी, अलमासुद्दीन सिद्दीकी समेत कुल 12 याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी।

आज केन्द्र सरकार की ओर से समय की मांग की गयी। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

इसी दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से यूसीसी नियमावली में संशोधन की बात पिछली तिथि को की गई थी। सरकार की ओर से क्या संशोधन किए गए हैं। प्रदेश सरकार को उसके संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसके बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस संबंध में अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में पिछले साल 27 जनवरी से यूसीसी एक्ट लागू हुआ है। यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों को अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। अधिकांश याचिकाओं में लिव इन रिलेशन के अलावा मुस्लिम समाज के विवाह, तलाक, इद्दत और विरासत के खिलाफ प्रावधानों को चुनौती दी गई है।

यह भी दलील दी गई कि यूसीसी देश के संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है, जो धर्म के पालन के साथ ही स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

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