लखनऊ , अगस्त 5 -- उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने राज्य की विद्युत व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ड्राफ्ट उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड-2026 जारी कर दिया है। यह नया ग्रिड कोड वर्ष 2007 से लागू ग्रिड कोड का स्थान लेगा और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड (आईईजीसी)-2023 के अनुरूप तैयार किया गया है।

ड्राफ्ट ग्रिड कोड में पिछले लगभग दो दशकों के दौरान बिजली क्षेत्र में हुए तकनीकी, नियामकीय और परिचालन संबंधी बदलावों को समाहित किया गया है। इसमें पहली बार राज्य स्तर पर प्राइमरी, सेकेंडरी एवं टर्शियरी रिजर्व, ब्लैक स्टार्ट रिजर्व, वोल्टेज कंट्रोल रिजर्व, सिक्योरिटी कंस्ट्रेन्ड यूनिट कमिटमेंट (एससीयूसी) तथा सिक्योरिटी कंस्ट्रेन्ड इकोनॉमिक डिस्पैच (SCED) जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।

इसके अलावा इंटीग्रेटेड रिसोर्स प्लानिंग, कम्युनिकेशन कोड तथा साइबर सिक्योरिटी कोड जैसे नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं, जिससे राज्य की विद्युत प्रणाली को अधिक सुरक्षित, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाया जा सके।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बढ़ती सौर एवं पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण प्रणाली (एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) तथा अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के प्रभावी एकीकरण के लिए भी व्यापक प्रावधान किए गए हैं। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को संतुलित एवं विश्वसनीय ढंग से पूरा करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट ग्रिड कोड में संसाधन योजना, ग्रिड कनेक्टिविटी, संरक्षण प्रणाली, संचार व्यवस्था, कमीशनिंग एवं वाणिज्यिक संचालन, ग्रिड संचालन, आवृत्ति नियंत्रण एवं रिजर्व प्रबंधन, शेड्यूलिंग एवं डिस्पैच, साइबर सुरक्षा तथा अनुपालन निगरानी सहित विद्युत प्रणाली के सभी प्रमुख पहलुओं को समग्र रूप से शामिल किया गया है। साथ ही उत्तर प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ राज्य-विशिष्ट प्रावधान भी बनाए रखे गए हैं।

श्री वर्मा ने कहा कि यह ड्राफ्ट ग्रिड कोड प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को आने वाले वर्षों के लिए नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। परिषद ड्राफ्ट ग्रिड कोड का विस्तृत अध्ययन कर रही है और जनहित तथा उपभोक्ता हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने सुझाव एवं आपत्तियां शीघ्र ही आयोग के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

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