लखनऊ , फरवरी 9 -- उत्तर प्रदेश लगातार देश के निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद राज्य बनता जा रहा है। 'इन्वेस्ट यूपी' की तेजी से काम करने वाली डिजिटल प्रणाली और शासन द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी के सक्रिय प्रयासों से लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की प्रक्रिया में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में एलओसी जारी करने की गति पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दो गुना बढ़ गई, जिससे औद्योगिक परियोजनाओं को धरातल पर उतारना और निवेशकों का विश्वास मजबूत करना आसान हुआ।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24 से 2025-26) में कुल 137 बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें 2,37,599.86 करोड़ रूपये का निवेश प्रस्तावित है। वित्त वर्ष 2023-24 में 10 प्रस्तावों के तहत 4,380.71 करोड़ रुपये निवेश निस्तारित हुआ, जबकि 2024-25 में 45 प्रस्तावों के 43,099.41 करोड़ और 2025-26 में अब तक 42 प्रस्तावों के 75,873.17 करोड़ रुपये निवेश की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 1,14,246.57 करोड़ रुपये मूल्य के 40 निवेश प्रस्ताव उच्च स्तरीय सक्षम समिति को भेजे जा चुके हैं।
क्षेत्रवार वितरण में पश्चिमांचल 32 प्रतिशत स्वीकृत प्रस्तावों के साथ सबसे आगे है, जबकि गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर मिलकर 29 प्रतिशत निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। पूर्वांचल 23 प्रतिशत और मध्यांचल 15 प्रतिशत के साथ पीछे हैं, जो राज्य में संतुलित औद्योगिक विकास को दर्शाता है। नीति के तहत आईआईईपीपी-2022 में 1.11 लाख करोड़ रुपये के 85 प्रस्ताव स्वीकृत और 1.10 लाख करोड़ रुपये के 30 अन्य प्रस्ताव मंजूरी की कतार में हैं। एफडीआई/एफआईआई और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के तहत 20,351.52 करोड़ रुपये के 21 प्रस्तावों में से 12,500 करोड़ के 13 प्रस्ताव मंजूर और 7,800 करोड़ रुपये के आठ प्रस्ताव अनुमोदन के लिये अग्रसारित किए गए। इस तेज व्यवस्था से निवेश के धरातलीय क्रियान्वयन और रोजगार सृजन को मजबूती मिल रही है।
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