प्रयागराज 24 अक्टूबर (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा की जमीनों को अपनी जमीन लेकर एक्सचेंज के यूपी रेवेन्यू कोड में दिए प्रावधान के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को सुनवाई के लिये मंज़ूर कर लिया है।

कोर्ट ने प्रदेश के महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है तथा सरकार से इस मामले में तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने बतौर अंतरिम आदेश कहा कि अगर प्रदेश में गांव सभा की जमीनों का एक्सचेंज होता है तो वह इस जनहित याचिका में पारित निर्णय के अधीन होगा।

यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा एवं जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने हाईकोर्ट अधिवक्ता चंद्रशेखर अग्निहोत्री की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया है। याचिका में यूपी रेवेन्यू कोड की धारा 101 को चुनौती दी गई है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार यादव ने तर्क दिया कि रेवेन्यू कोड की संशोधित धारा 101 से गांव सभा की सुरक्षित भूमि जिसे धारा 77 से सुरक्षित भूमि घोषित किया गया है, वह प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है। इससे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हो रहा है।

अधिवक्ता आलोक की बहस थी कि इस संशोधित प्रावधान से गांवों की मूल संरचना प्रभावित हो रही है। कहा गया कि प्रदेश में भू माफिया इस प्रावधान का लाभ लेकर गांव सभा की कीमती जमीन को कम कीमत की अपनी भूमि एक्सचेंज करा ले रहे हैं। कोर्ट को बताया गया कि भू माफियाओं के इस कृत्य में अधिकारियों की मिलीभगत है। चूंकि जनहित याचिका में यूपी रेवेन्यू कोड के धारा 101 को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, इस कारण कोर्ट ने सीपीसी के प्रावधान के तहत प्रदेश के महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है। याचिका में कोर्ट के समक्ष एक्सचेंज से गांव सभा की प्रभावित हो रही जमीनों का भी उल्लेख किया गया।

हाईकोर्ट अब इस याचिका पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

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