लखनऊ , अगस्त 21 -- उत्तर प्रदेश और जापान के बीच सहयोग को अब संवाद और समझौता ज्ञापन (एमओयू) तक सीमित रखने के बजाय ठोस परियोजनाओं, निवेश और वास्तविक कारोबारी परिणामों में बदलने पर जोर दिया गया है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 में यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा को जापान और यामानाशी की तकनीकी विशेषज्ञता तथा मानव संसाधन से जोड़कर दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक लाभ के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

उन्होंने भारत एवं उत्तर प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जापानी दूतावास और दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि दिल्ली, नोएडा और लखनऊ में हुए संवाद से सहयोग के कई विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान हुई है। उन्होंने जापानी कंपनियों से उत्तर प्रदेश की नीतियों, विकास प्राथमिकताओं और उद्योगों की जरूरतों को समझने तथा भारतीय कंपनियों और विश्वविद्यालयों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया।

गवर्नर ने कहा कि सम्मेलन में 200 से अधिक जापानी बिजनेस लीडर्स की भागीदारी भारत और उत्तर प्रदेश के साथ साझेदारी को लेकर जापानी उद्योग जगत की गंभीरता को दर्शाती है।

नागासाकी ने मानव संसाधन, विशेषकर नर्सिंग और नर्सिंग केयर को महत्वपूर्ण सहयोग क्षेत्र बताते हुए कहा कि यामानाशी में इन क्षेत्रों में जरूरत लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की बड़ी और सक्षम मानवशक्ति इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल जापान के लिए श्रमशक्ति उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे कुशल मानव संसाधन तैयार करना है, जो अगले 20 से 30 वर्षों तक जापान, यामानाशी, भारत और उत्तर प्रदेश के उद्योगों में योगदान कर सकें। इसके लिए दोनों पक्षों को प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास की साझा जिम्मेदारी निभानी होगी।

यामानाशी के गवर्नर ने पर्यटन को भी यूपी-यामानाशी सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि यामानाशी के पास नवीकरणीय ऊर्जा से हाइड्रोजन उत्पादन, उसके भंडारण और औद्योगिक उपयोग का समग्र हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित करने का अनुभव है। यामानाशी हाइड्रोजन कंपनी के माध्यम से प्रीफेक्चर और निजी क्षेत्र की कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं।

नागासाकी ने कहा कि हाइड्रोजन क्षेत्र में किसी एक तकनीक पर ध्यान देने के बजाय उत्पादन, भंडारण और उपयोग को जोड़ते हुए पूरी प्रणाली विकसित करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, औद्योगिक मांग और अनुकूल नीतिगत वातावरण को देखते हुए यामानाशी के अनुभव के आधार पर यहां बड़े स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना विकसित की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन में सहयोग को केवल पायलट परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यावसायिक और विस्तार योग्य मॉडल में बदलने की आवश्यकता है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ प्रशिक्षण, अनुसंधान, संचालन और रखरखाव के क्षेत्रों में सहयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय और जापानी कंपनियां मिलकर व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तकनीकी समाधान विकसित कर सकती हैं। नागासाकी ने अक्टूबर में प्रस्तावित इंटरनेशनल हाइड्रोजन समिट में उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को आमंत्रित भी किया।

गवर्नर ने यूपी-यामानाशी साझेदारी के अगले चरण के लिए तीन सूत्र बताए-पहले एक-दूसरे को समझें, फिर उपयुक्त साझेदार तलाशें और उसके बाद मिलकर ठोस परियोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लगातार यात्राओं और संवाद से संबंध मजबूत हुए हैं। अब समय है कि इस मजबूत रिश्ते को वास्तविक परियोजनाओं, निवेश और कारोबारी परिणामों में बदला जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि दिल्ली, लखनऊ और यामानाशी को जोड़ने वाली पहल दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी की मजबूत आधारशिला बनेगी।

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