लखनऊ , अप्रैल 2 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सहायता प्राप्त मदरसों में संचालित मिड-डे मील योजना में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच के आदेश के बाद इसकी कवायद तेज हो गई है। यह जांच प्रदेश के सभी 558 सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसों में कराई जाएगी।

मिड-डे मील प्राधिकरण की निदेशक मोनिका रानी द्वारा 23 मार्च को जारी पत्र के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायतों की जांच कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस पत्र के साथ 30 जनवरी को यूपी ऑल इंडिया पसमान्दा मंच की ओर से दी गई शिकायत भी संलग्न की गई है, जिसमें विभिन्न जिलों के मदरसों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार को शिकायतें मिली हैं कि मदरसों में छात्रों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि मदरसों के बच्चों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो और उन्हें बेहतर शिक्षा के साथ गुणवत्तापूर्ण भोजन भी मिले।

मंत्री ने कहा कि यदि मिड-डे मील योजना में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो यह सरकार की मंशा के विपरीत है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जांच किसी एक विशेष घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना की समग्र गुणवत्ता का आकलन करने के उद्देश्य से कराई जा रही है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, बलरामपुर के तीन सहायता प्राप्त मदरसों-मदरसा आयशा सिद्दीका, मदरसा दारुल उलूम फारूकिया और मदरसा फज़ले रहमानिया-में लगभग 8 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। इस संबंध में 26 नवंबर 2025 को कोतवाली नगर थाने में 44 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से 12 की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। मामले के सामने आने के बाद तीनों मदरसों के प्राचार्यों को निलंबित कर दिया गया।

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