चंडीगढ़ , अप्रैल 02 -- सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और फगवाड़ा से विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने गुरूवार को उत्तर प्रदेश के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसने भाजपा सरकार के दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब कर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा से दलितों के खिलाफ रही है और रिंकू सिंह राही इसका एक बड़ा उदाहरण हैं।श्री धालीवाल ने कहा कि यह भाजपा ही थी जिसने 2018 में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने का प्रयास किया था। इसके बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें 14 दलित युवाओं की जान चली गई। हजारों युवाओं पर मामले दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया और आज भी वे अदालतों में उन मामलों को लड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का इस्तीफ को नामंजूर करे और उन्हें सम्मानजनक पोस्टिंग दी जाए।

उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दलित युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को तुरंत वापस लेने की भी मांग की।

विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार के शासन में देशभर में दलितों के खिलाफ अत्याचार और भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि दलित छात्रों को स्कूलों और कॉलेजों में मेरिट हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है और नौकरी मिलने के बाद भी उन्हें उसे बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, कई लोगों को इस हद तक प्रताड़ित किया जाता है कि वे आत्महत्या जैसे चरम कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने छात्र रोहित वेमुला और आईपीएस अधिकारी वाई. पूर्ण सिंह जैसे उदाहरण दिए।

श्री धालीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि दलित छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन में जानबूझकर कम अंक दिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि भर्ती के मानदंड इस तरह से तैयार किए जाते हैं कि योग्य दलित उम्मीदवार भी नौकरी हासिल न कर सकें। हरियाणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में 120 शिक्षकों की भर्ती में केवल तीन दलितों का चयन किया गया, जबकि 117 उम्मीदवारों को "नॉट फाउंड सूटेबल" यानी 'उपयुक्त नहीं पाया गया' कहकर खारिज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की अन्य भर्तियों में भी इसी तरह का पैटर्न देखा गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के 2023 बैच के अधिकारी रिंकू सिंह राही एक ईमानदार अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने पीसीएस कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन पर कथित तौर पर हमला किया गया था जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं, उन्हें अपनी एक आंख गंवानी पड़ी और उनका जबड़ा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी, आईएएस अधिकारी बने और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि रिंकू सिंह को इस हद तक परेशान किया गया कि उन्हें आठ महीने तक कोई काम नहीं दिया गया, जिससे उन्हें तकनीकी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के मामले पर गौर करने की अपील की है।

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