लखनऊ , मई 7 -- राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को तीन दिवसीय 'यूपी एनर्जी एक्सपो-2026' का भव्य शुभारंभ हुआ। ऊर्जा, सौर तकनीक और नवीकरणीय संसाधनों पर केंद्रित इस एक्सपो में देश-विदेश की 200 से अधिक कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए हैं।
एक्सपो का उद्घाटन उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का आयोजन यूपीपीएचडीसीआईआई (पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज), फर्स्ट व्यू और यूपीनेडा के सहयोग से किया गया है। आयोजन को इन्वेस्ट यूपी, सेवा, सिगएनर्जी इंडिया, ऑइकन सोलर, केईआई इंडस्ट्रीज लिमिटेड, पॉलीकैब इंडिया, साएल इंडस्ट्रीज, रेडिको खेतान, एरम फिनटैक्स इंडिया, सिनको एनर्जी और ट्रू पावर सहित कई संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में 52 हजार से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित कर उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के कारण लगभग 6500 एकड़ भूमि की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा क्षेत्र में किसी प्रकार के नीतिगत बदलाव की आवश्यकता होगी तो राज्य सरकार उस पर गंभीरता से विचार करेगी।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि अगले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश देश का ऊर्जा हब बन सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार थर्मल, सोलर, हाइब्रिड और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं पर बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने उद्यमियों से प्रदेश में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि यूपीनेडा, यूपीपीसीएल और राज्य सरकार उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
डॉ. गोयल ने कहा कि प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ट्रांसफार्मर क्षति दर में भारी कमी आई है और अब यह घटकर मात्र 0.5 प्रतिशत रह गई है।
यूपीनेडा के निदेशक रविंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक पांच लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे लगभग 1700 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित हुई है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 3038 करोड़ रुपये तथा राज्य सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्रदान की है।
पीएचडीसीसीआई के सह-अध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने कहा कि हरित ऊर्जा, फिनटेक और कृषि-प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भारत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं सह-अध्यक्ष राजेश निगम ने कहा कि भारत में ऊर्जा के वैकल्पिक संसाधनों की प्रचुर संभावनाएं हैं और नवीकरणीय ऊर्जा देश का भविष्य है।
सेवा के अध्यक्ष पराग मिश्रा ने बताया कि एक्सपो में रूफटॉप सोलर सिस्टम, बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
फर्स्ट व्यू के सीईओ वरुण गुलाटी ने कहा कि एक्सपो का उद्देश्य लोगों को नई सौर तकनीकों और ऊर्जा नवाचारों से जोड़ना है। वहीं पीएचडीसीसीआई के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन में तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं।
एक्सपो के दूसरे चरण में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 30 से अधिक विशेषज्ञों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, तकनीकी नवाचार और भविष्य की रणनीतियों पर विचार साझा किए। दिनभर बड़ी संख्या में लोग एक्सपो का अवलोकन करने पहुंचे।
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